पीडीएनए की प्रक्रिया मे भू-धसाव प्रभावित जोशीमठ के व्यवसायियों व काश्तकारों को सम्मलित करने की दरकार
भू-धसाव आपदा वर्ष 2023 से अब तक सीमांत नगर जोशीमठ के व्यवसायियों व किसानों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये से लोगों मे शासन तंत्र के खिलाफ गुस्सा भी है जो कभी भी विस्फोटक स्थिति के रूप मे सामने आ सकता है। लेकिन अब पूरा उत्तराखंड ही आपदा की चपेट मे हैं, तो सरकार भी कुछ सक्रिय हुई है, चमोली, पौड़ी, उत्तरकाशी, बागेश्वर, देहरादून सहित अन्य जनपदों मे हुई तबाही ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है पर यह धरातल पर कब उतरेगा यह समय ही बताएगा।
अब सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, ड्राइवर, क्लीनर, टैक्सी संचालक, तीर्थ पुरोहित, किसान, फल-फूल सब्जी विक्रेता, टूरिस्ट गाइड आदि व्यवसायियों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नुकसान की भरपाई के लिए इन सबको पीडीएनए ” पोस्ट डिजास्टर नीड्स ऐसेसमेंट” के तहत आंकलन करने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मानसून सीजन मे राज्य को हुई का क्षति के आंकलन करने के लिए पीडीएनए की प्रक्रिया प्रारम्भ हो रही है। पर प्रश्न यह है कि पीडीएनए की टीम केवल मानसून सीजन मे हुए नुकसान का आंकलन करेगी या जनवरी 2023 जोशीमठ भू-धसाव प्रभावित व्यवसायी भी इस परिधि मे होंगें, इस पर अभी संसय बना हुआ है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा 2025 मे जहाँ आपदा की घटनाएं घटित हुई हैं उसी क्षेत्र को पीडीएनए की प्रक्रिया मे शामिल किया जा रहा है, जोशीमठ मे तो शीघ्र ही आपदा के बाद हुए आंकलन के अनुसार निर्माण कार्य शुरू होने हैं, इसलिए जोशीमठ को इस प्रक्रिया मे सम्मलित नहीं किया जा सकता।
पीडीएनए आंकलन प्रक्रिया मे केवल वर्ष 2025 की आपदाओं को सम्मलित किए जाने की जानकारी मिलने पर मूल निवासी स्वाभिमान संगठन ने इस पर गहरी नाराजगी ब्यक्त की है, मंगलवार को संगठन के अध्यक्ष भुवन चन्द्र उनियाल ने जिला मुख्यालय मे जिलाधिकारी चमोली से भेंट कर जोशीमठ भू धसाव प्रभावित व्यवसायियों एवं काश्तकारों को भी पीडीएनए प्रक्रिया मे सम्मलित करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।









