खिलाड़ी अर्जुन की तरह लक्ष्य साधें – प्रो. अग्रवाल

कुलगुरु ने कहा कि तीरंदाजी केवल खेल नहीं, बल्कि एकाग्रता, सहनशीलता, अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक है। उन्होंने महाभारत कालीन अर्जुन की एकाग्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि लक्ष्य साधने के लिए शरीर और मन की ऊर्जा का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने प्रतियोगिता का उद्घाटन ध्वजारोहण और ‘जन गण मन’ के गायन के साथ किया और खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर प्रतीकात्मक रूप से धनुष से निशाना साधा।

महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीकांत ने कुलगुरु का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाली टीम का आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व कुलगुरु का स्वागत राजस्थानी साफा, उपर्णा और स्मृति चिन्ह से किया गया।

प्रतियोगिता के आयोजन सचिव नैनाराम, खेल अधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह, और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि डॉ. जितेंद्र थदानी, डॉ. आशा नायर सहित अनेक प्राध्यापक उपस्थित रहे। मंच संचालन दिशा ने किया।