उच्च न्यायालय में सड़कों को बदहाल स्थिति को लेकर लगी याचिका पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने जताई नाराजगी
बिलासपुर, 4 सितंबर । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में राष्ट्रीय राजमार्ग के रायपुर से बिलासपुर और पेंड्रीडीह से नेहरू चौक की सड़क के हालत को शामिल कर चल रही जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश विभु दत्त गुरु की खंडपीठ में सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई के दौरान पिछले 25 अगस्त 2025 के आदेश का पालन करने के निर्देश के बारे में जानकारी मांगी गई। राष्ट्रीय राजमार्ग की तरफ से धीरज वानखेड़े ने बताया कि रतनपुर तरफ की सड़क के मरम्मत कर दी गई है, इसके अलावा अन्य कार्य किया जा है।
वहीं हाईकोर्ट के सामने गुजरने वाली सड़क के बारे में उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पूछा, जिसपर अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने बताया कि यह कंक्रीट सड़क है, इसलिए उसे भरा जा सकता है और यह काम किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा कि फिर इसमें क्रैक आ जाएगा समस्या बनी रहेगी। जिसके जवाब में कहा गया कि इस सड़क को फिर से रिन्यू किया जाना है। जिसके लिए एक सर्वे NIT रायपुर के लिए प्रोपोजल भेज दिया गया है। जिसकी जानकारी पूर्व में शपथपत्र में दी गई है। वहीं इस पर न्यायालय ने पूछा कि कब तक प्रपोजल को पूरा कर लिया जाएगा, कोई समय बताएं..? जिसका जवाब दिया गया किया समय लगेगा..! न्यायालय ने इस पर कहा कि जब राज्य शासन को ऐसे करना है तो क्या दिक्कत आ रही है?
इस दौरान कोर्ट कमिश्नर ने कहा कि 25 अगस्त 2025 के आदेश में लोक निर्माण विभाग के सचिव को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि इस मामले में त्वरित सकारात्मक कदम उठाए जाएं। जिसमें अनुदैर्ध्य दरारें हैं और जहाँ ब्लैक स्पॉट पहचाने गए हैं। उक्त सड़क की उचित मरम्मत और पुनर्निर्माण तुरंत किया जाना चाहिए ताकि मौजूदा दरारों और क्षति से उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय दुर्घटना या घटना को रोका जा सके। वह इस मामले में सचिव ने आज शपथ पत्र पेश किया है। जिसमें कहा गया है कि विभाग ने नियमित आधार पर सड़क के किनारे की सफाई भी शुरू कर दी है। सड़क के मध्य भाग और ग्रिल को नए सिरे से रंगा जा रहा है। सभी स्ट्रीट लाइटों पर नए सिरे से पेंट किया जा रहा है। लेकिन सड़क की मरम्मत के संबंध में हमने इसे शुरू कर दिया है।
उच्च न्यायालय ने समझाया पिछले आदेश की क्या मायने हैं?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पिछले आदेश का मतलब यह था कि कोई ठोस कदम उठाए जाएं यह नहीं कि केवल रंगाई पुताई की जाए। शासन की तरफ से कहा गया कि इस सड़क के अध्ययन के लिए टेंडर देने के लिए आमंत्रित किया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा आदमी क्या करेगा, आप तो स्टडी करते रहिए 5 साल, हम इसे बंद कर देते हैं। न्यायालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 15 किलोमीटर सड़क के लिए कितना समय लगता है? आपको तो यह पहले नहीं दिख रहा था, जब उसे न्यायालय ने संज्ञान लिया, तब आपको स्टडी नजर आया। न्यायालय ने यह बहुत दुखद है कि हमें इस सब में
इतना समय बर्बाद करना पड़ रहा है, यह आपका काम है। आपको तत्काल कार्रवाई करनी होगी। शासन का इस पर जवाब आया कि यह प्रस्ताव स्वीकार किया है कि एनआईटी रायपुर एक सर्वेक्षण आयोजित करेगा। जल्द ही इसकी टीम आकर सर्वे करेंगे। इसमें समय लगेगा। न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि शासन इस सड़क को एनआईटी सर्वे करके इसकी रिपोर्ट दो हफ्ते में रखी सुनवाई में जानकारी दें । उक्त सड़क की व्यवहार्यता की जांच करने के लिए एनआईटी रायपुर सर्वे कर शासन को भेजे और इस मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। वहीं अगली सुनवाई 23 सितंबर को रखी गई है।









