शिमला में पानी का संकट, पेयजल योजनाओं में गाद से आपूर्ति ठप्प
शहर की प्रमुख पेयजल योजनाएं चाबा, गुम्मा और गिरी परियोजना भारी बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। चाबा का पंपिंग स्टेशन डूब गया है। गुम्मा के नौटी खड्ड में बाढ़ जैसे हालात बन गए, यहां पानी का स्तर नजदीकी घरों तक पहुंच गया और पाइप लाइन को भी नुकसान पहुंचा है। गिरी परियोजना में भी बारिश के कारण गाद भर गई है, जिससे पानी की पंपिंग पूरी तरह ठप है। अन्य पेयजल योजनाओं में भी गाद आने से सप्लाई बाधित है।
स्थिति को देखते हुए शिमला जल प्रबंधन निगम ने शहरवासियों से सहयोग की अपील की है। निगम ने लोगों से कहा है कि अगले दो-तीन दिन पानी को जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें। निगम के कर्मचारी लगातार परियोजनाओं से गाद हटाने का काम कर रहे हैं, लेकिन अगर बारिश का दौर जारी रहा तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
उधर, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि अगले एक-दो दिन शिमला शहर में पानी की किल्लत हो सकती है। उन्होंने बताया कि अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात पेयजल योजनाओं को बहाल करने में जुटे हैं और जल्द स्थिति सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में अंग्रेजों के जमाने की पाइपलाइन बदली जा रही है और भविष्य में पानी की दिक्कत खत्म करने के लिए 2 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसी बीच, शिमला के सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से सुन्नी-थली को जोड़ने वाला पैदल पुल, सुन्नी आईटीआई, फॉरेस्ट रेस्ट हाउस और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जलमग्न हो गए हैं। आसपास के घरों में पानी घुस गया है और पुल के साथ बने गौ सदन में पानी भर जाने से कुछ मवेशी डूब गए हैं। प्रशासन ने पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है और लोगों को नदी के नजदीक न जाने की हिदायत दी है।
फिलहाल किसी तरह के जानी नुकसान की खबर नहीं है। मौसम विभाग ने 20 अगस्त तक हिमाचल के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में शहरवासियों को अगले कुछ दिनों तक पेयजल संकट और बारिश से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।









