मांगों को लेकर झज्जर में सड़कों पर उतरे नगर परिषद के सफाई कर्मचारी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने का जो नया आदेश लागू किया गया है, वह कर्मचारियों की निजता का उल्लंघन है। सफाई कर्मचारियों ने कहा कि मोबाइल फोन उनकी निजी संपत्ति है और हर समय ऐप के जरिए लोकेशन ट्रेस किया जाना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि असम्मानजनक भी है।

विरोध कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के समक्ष अपनी मुख्य मांगें दोहराईं हैं। कर्मचारियों ने शहर में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए उनकी ड्यूटी लगाए जाने का भी विरोध किया। प्रधान शिवम चावरिया ने कहा, “हमारी जिम्मेदारी सफाई करना है, न कि नालों से पानी निकालना। यह काम सिंचाई विभाग या नगर निकाय की विशेष टीमों का है। सफाई कर्मचारियों पर हर तरह की जिम्मेदारी थोपना अन्याय है।

सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान शिवम चावरिया ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार ने जल्द ही हमारी मांगों को नहीं माना, तो हम राज्यव्यापी आंदोलन की ओर बढ़ेंगे। यह सिर्फ झज्जर तक सीमित नहीं रहेगा। कर्मचारियों के इस संगठित और आक्रामक विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल देखी गई है। नगर परिषद और जिला प्रशासन ने फिलहाल इस मसले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार कर्मचारियों की मांगों पर विचार करती है या आंदोलन और तेज होगा।