कारगिल विजय दिवस पर भूतपूर्व सैनिकों ने साझा किए अपने अनुभव
उपायुक्त ने बताया कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों में करीब 20 फीसदी हिमाचल से थे। उन्होंने हिमाचल को ‘वीरभूमि’ बताते हुए कहा कि हमारे सैनिकों ने हर कठिन परिस्थिति में साहस दिखाया है। सैनिकों की वीरता और अनुशासन सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने देश के गौरवमयी इतिहास की रक्षा के लिए समर्पित रहने की शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर शिमला जिले के सात पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया जिनमें सूबेदार मेजर दिवाकर दत्त शर्मा, सूबेदार मेजर राम लाल शर्मा, सूबेदार वेद प्रकाश शर्मा, हवलदार राम लाल, नायक प्रवीण और नायक जय सिंह शामिल रहे।
पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि युद्ध के दौरान बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। दिवाकर दत्त शर्मा ने बताया कि छुट्टी से लौटकर वह सीधे कारगिल पहुंचे, जहां माइनस 30-40 डिग्री तापमान में दुश्मन की पहाड़ियों पर चढ़ाई कर पीछे से हमला किया गया।
राम लाल शर्मा ने कहा कि जब उनका एक साथी शहीद हुआ, तब पूरी यूनिट का हौसला कमजोर पड़ने लगा लेकिन साथियों की शहादत का बदला लेने के जज्बे ने सबको मजबूत बनाए रखा।
नायक प्रवीण ने बताया कि द्रास सेक्टर में तीन महीने तक बिना नहाए, सीमित भोजन और कठिन हालात में लड़ाई लड़ी गई। युद्ध के बाद जब वह घर लौटे तो लोगों ने उनका बैंड-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया।
कार्यक्रम में देशभक्ति, साहस और बलिदान की मिसाल बने सैनिकों को नमन किया गया।









