चौंकाने वाला फैसला: एक्टर विजय राज 5 साल पुराने सेक्शुअल हैरेसमेंट केस में निर्दोष घोषित!
अभिनेता विजय राज को यौन उत्पीड़न और पीछा करने के आरोपों से न्यायालय द्वारा बरी कर दिया गया है। यह मामले फिल्म ‘शेरनी’ के शूटिंग के दौरान एक सहकर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें विद्या बालन भी मुख्य भूमिका में थीं। एक बार जब न्यायालय ने इनके खिलाफ लगे सभी आरोपों की सुनवाई की, तब उन्होंने विजय राज को निर्दोष करार दिया और उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। इस विषय पर उनके वकील, प्रसिद्ध अधिवक्ता सवीना बेदी सच्चर ने कहा कि विजय राज ने इस मामले की वजह से न केवल फिल्म की शूटिंग को अधूरा छोड़ा बल्कि इसके चलते कई पेशेवर अवसर भी खो दिए। अब, जब उन्हें न्यायालय ने निर्दोष कर दिया है, सवीना बेदी यह उम्मीद करती हैं कि यह मामला उन लोगों के लिए उदाहरण बनेगा जो जल्दी से किसी पर आरोप लगाते हैं और उसे दोषी मान लेते हैं।
यह मामला 4 नवंबर, 2020 का है, जब मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक होटल में ठहरे फिल्म के क्रू मेंबर ने विजय राज पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस मामले के सिलसिले में विजय राज को तत्काल गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उन्हें उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया था। अपने करियर के शुरुआती हिस्से में, विजय राज को साल 2005 में दुबई में ड्रग्स रखने के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, वह जमानत पर बाहर आ गए थे।
बॉलीवुड अभिनेता विजय राज ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ‘कौवा बिरयानी’ सीक्वेंस के लिए खास पहचान बनाई। उनकी कुछ चर्चित फिल्मों में ‘रन’, ‘धमाल’, ‘वेलकम’, ‘दीवाने हुए पागल’, ‘रघु रोमियो’, ‘मुंबई एक्सप्रेस’, ‘बॉम्बे टू गोवा’ और ‘मानसून वेडिंग’ शामिल हैं। विजय राज की कॉमिक टाइमिंग और अभिनय कौशल उन्हें भारतीय सिनेमा में एक अनोखा स्थान दिलाता है।
आरोपों से बरी होने के बाद विजय राज का मानना है कि यह अनुभव उनके लिए एक सीखने का अवसर रहा है और उन्होंने बताया कि न्याय व्यवस्था पर उनका भरोसा हमेशा बना रहा। कोर्ट के फैसले के बाद अब वह अपने फिल्मी करियर को फिर से नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि इस मामले में विजय राज की जीत एक प्रेरणा है उन व्यक्तियों के लिए जो निराधार आरोपों का सामना कर रहे हैं।
विजय राज के साथ हुए इस अनुभव ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को भी उजागर किया है, जो है आरोपों का तुरंत प्रभाव न होने का। उनकी वकील ने कहा कि ऐसे मामलों में जाँच करना और उनके परिणाम की प्रतीक्षा करना ज़रूरी है, बजाय इसके कि हम किसी को तुरंत दोषी मान लें। विजय राज की स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, ताकि न्याय का सही रूप सामने आ सके।









