कपूरथला में ‘रहस्यमयी फायर बॉल’ का आतंक: वीडियो वायरल, धमाके से दहशत!
कपूरथला में बुधवार की आधी रात एक अनोखी घटना घटित हुई, जिसने स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। एक युवक ने रात 1:08 बजे आसमान से गिरते एक फायर बॉल की वीडियो बनाई। युवक ने जानकारी दी कि वह अपने कजिन और दोस्तों के साथ एक ऑनलाइन स्टडी सत्र में था। अचानक, उसे कुत्तों की तेज भौंकने की आवाज सुनाई दी और उसके साथ-साथ एक कंपन का अहसास भी हुआ। जब उसने अपने दोस्तों को यह बात बताई, तो उन्होंने इसे मजाक समझा, लेकिन युवक ने घबराकर बालकनी में जाकर मोबाइल कैमरा से वीडियो बनाने का निर्णय लिया। इसी दौरान, उसने आसमान में गिरते हुए फायर बॉल को देखा, जिसके साथ धमाके की आवाज भी आई। युवक ने इस अद्भुत घटना की 9 सेकंड की क्लिप भी बना ली।
रक्षा मंत्रालय की PIB वेबसाइट पर जारी किए गए एक बयान के अनुसार, यह घटना भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नीति से संबंधित हो सकती है। पाकिस्तान ने पंजाब के 15 क्षेत्रों में भारत पर हमले करने की कोशिश की थी, जिसे हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक रोका। ये हमले पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, आदमपुर, लुधियाना, बठिंडा और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्र में किए गए थे। बावजूद इसके, कपूरथला पुलिस प्रशासन अभी तक इस घटना की आधिकारिक पुष्टि करने से बच रहा है।
कपूरथला में जिला प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। जिला मजिस्ट्रेट या डीसी ने कहा कि यह आदेश आगामी पांच जुलाई तक लागू रहेगा। इस अवधि में शादी समारोह, उत्सवों और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी पटाखों और आतिशबाजी पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। यह निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, खासकर उस क्षेत्र में जहाँ सैन्य गतिविधियों का लगातार संचालन होता है।
स्थानीय प्रशासन का मानना है कि पटाखों का उपयोग न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है, बल्कि यह उन क्षेत्रों में भी समस्याएँ पैदा कर सकता है जहाँ सैनिकों का आवागमन अधिक होता है। ऐसे में, प्रशासन ने फैसला किया है कि सभी प्रकार की आतिशबाजी पर रोक लगाई जाए ताकि असामान्य परिस्थितियों से बचा जा सके। यह निर्णय एक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है, ताकि संभावित खतरों के प्रति समाज को सुरक्षित रखा जा सके।
इस अप्रत्याशित घटना ने न केवल स्थानीय निवासियों को हैरान किया है, बल्कि सुरक्षा विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस स्थिति का कैसे सामना करेगा और स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी कब तक साझा करेगा।









