राजस्थान में 1200 करोड़ की धांधली: तकनीक ने बचाया खजाना, 5000+ मनरेगा कर्मचारी नोटिस तले!

राज्य में महात्मा गांधी नरेगा योजना (MGNREGA) के तहत श्रमिकों की उपस्थिति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस स्थिति में मेट, जो ग्रामीण कार्यों के पर्यवेक्षक होते हैं, ने जो तस्वीरें प्रदान कीं, उनके माध्यम से श्रमिकों की फर्जी अटेंडेंस को दर्शाया गया। इस घोटाले के तहत मात्र एक या दो श्रमिकों को कार्यस्थल पर बुलाकर उनकी फोटो खींची जाती थी, जबकि मस्टररोल में 20 या उससे अधिक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की जाती थी। ग्रामीण विकास विभाग ने इस मामले का खुलासा एक नई तकनीक के माध्यम से किया है, जिसके चलते एक बड़ी राशि, लगभग 1200 करोड़ रुपये, का नुकसान होने से रोका गया है। इस आंतरिक ऑडिट के परिणामस्वरूप, लगभग 1700 मेट को ब्लैकलिस्ट किया गया है और 5000 से अधिक कर्मचारियों को चेतावनी नोटिस जारी किया गया है।

गौरतलब है कि एनएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) को दो साल पहले लागू किया गया था। विभाग ने इसी सिस्टम का उपयोग करते हुए फोटो विश्लेषण शुरू किया, जिससे फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। एक ही कार्यस्थल के लिए कई बार एक ही तस्वीर का उपयोग कर श्रमिकों की उपस्थिति को बढ़ाने का प्रयास किया गया। कुछ मामलों में, मस्टररोल में श्रमिकों की संख्या और तस्वीरों में प्रदर्शित श्रमिकों की संख्या में भारी अंतर पाया गया।

मनरेगा में चार प्रमुख तरीकों से फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। पहला तरीका था कार्यस्थल पर ली गई तस्वीरों में प्रदर्शित श्रमिकों की संख्या और मस्टररोल में दर्ज उपस्थिति में असमानता। दूसरा तरीका यह था कि एक ही फोटो को अलग-अलग मस्टररोल में बार-बार अपलोड किया गया। तीसरा तरीका सुबह और दोपहर के समय की तस्वीरों में श्रमिकों की संख्या में अंतर दिखाना था। चौथा और अंतिम तरीका, जो सबसे अधिक चौंकाने वाला था, वह था कि मोबाइल से किसी दूसरी स्क्रीन से तस्वीर खींचकर उसे मेट द्वारा अपलोड करना।

उपरोक्त सबूतों के आधार पर, ग्रामीण विकास विभाग ने फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए तीन स्तरीय जांच प्रक्रिया का सहारा लिया है। इस प्रक्रिया में राज्य स्तर पर एक विशेष टीम बनाई गई है, जो कि फोटो और मस्टररोल की प्रविष्टियों की तुलना करती है। अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो इसे जिला और ब्लॉक स्तर पर भी जॉज किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कहीं और कोई अनियमितता न हो।

राज्य ने श्रमिकों की पहचान को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को अनुरोध किया था कि श्रमिकों की पलक झपकाते हुए फोटो खींचने का विकल्प शामिल किया जाए। इस तकनीक के सफल क्रियान्वयन से अब मेट फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इससे विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह प्रणाली फर्जीवाड़े को रोकने में बेहद प्रभावी साबित होगी। इस नई प्रणाली की सहायता से अब श्रमिकों की संख्या में स्थिरता लाई जा सकेगी और कार्यक्रम की पारदर्शिता में वृद्धि की जाएगी।