कुरुक्षेत्र में चढूनी की चेतावनी: हरियाणा की दीवार से पंजाब में बाढ़ का खतरा!

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने हाल ही में कुरुक्षेत्र में मीडिया से बातचीत करते हुए पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वह भाखड़ा नहर का पानी रोकने का प्रयास कर रही है। चढूनी ने इस मुद्दे पर विचार करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, हरियाणा भारत का अभिन्न हिस्सा है और पंजाब इसका छोटा भाई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पानी की आपूर्ति रोके जाने से पंजाब में बाढ़ आ सकती है, इसलिए इसे एक संघर्ष का साधन नहीं बनाना चाहिए। चढूनी ने स्पष्ट किया कि पानी पर राजनीति खत्म होनी चाहिए।

इसके अलावा, चढूनी ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर सुरक्षा चुक की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि घटना के समय हजारों शनिवार पर्यटक वहां मौजूद थे, लेकिन ना तो सेना की मौजूदगी थी और ना ही पुलिस की। उनके अनुसार, यह एक गंभीर चूक है या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। चढूनी ने इस विषय पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और इस समय हमें एकजुटता दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई पर कोई भी ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि हम सबको एक सोच के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

चढूनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उस पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। चढूनी ने कहा कि यह लड़ाई हिंदू और मुसलमान की नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान की है। उन्होंने मारे गए मुसलमान को शहीद मानते हुए उनका सम्मान किया और यह कहा कि ऐसे समय में हमें देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार हैं और उसके लिए जितनी भी कुर्बानी देनी पड़े, देने को तैयार हैं। उनका मुख्य संदेश यह था कि पहले हमारा देश है, फिर बाकी चीज़ें आती हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि देश के भीतर हिंदू-मुस्लिम के बीच मतभेदों को भड़काना गलत है और ऐसा करने के पीछे पाकिस्तान का इरादा है। चढूनी ने इस पर जोर देते हुए कहा कि हमें पाकिस्तान की इस जनविरोधी हरकत का जवाब देकर अपने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस प्रकार, चढूनी ने अपने विचारों से यह स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन केवल कृषि के मुद्दों पर नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और एकता के मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाती है। उनका यह संदेश विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो राजनीति को धार्मिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।