6 महीने की गर्भवती पाकिस्तानी महिला पंजाब से लापता: पुलिस के भी उड़ गए होश!
गुरदासपुर, पंजाब से एक पाकिस्तानी महिला, जिसका नाम मारिया बीबी है, हाल ही में अचानक गायब हो गई। दिलचस्प बात यह है कि वह 6 महीने की गर्भवती हैं और उनका यह पहला बच्चा होगा। हालांकि, उन्हें भारतीय सरकार द्वारा वीजा रद्द होने के बाद पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया था। इस आदेश के बाद पंजाब पुलिस ने मारिया को चेतावनी दी थी कि यदि वह पाकिस्तान नहीं लौटती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इसी बीच, मारिया ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था कि उनका लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) स्वीकृत किया जाए ताकि वह यहां रह सकें।
मारिया ने स्पष्ट रूप से कहा है, “मैं वापस नहीं जाना चाहती। मुझे अपने ससुराल में रहना है। मैं गर्भवती हूं और यह मेरे लिए बेहद मुश्किल है।” दैनिक भास्कर के एक संवाददाता ने जानकारी दी कि वह शनिवार रात को गुरदासपुर के सठियाली स्थित सरकारी अस्पताल गई थीं, जहां एक गायनोकॉलोजिस्ट ने उनका चेकअप किया। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह घर में फर्श पर गिर गई थीं। चेकअप के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, लेकिन इसके बाद से उनके बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं मिली।
यहां यह उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारतीय सरकार ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे। जिन लोगों के पास लॉन्ग टर्म वीजा था, उन्हें भी पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया। केवल चिकित्सा वीजा पर आने वाले लोगों को 29 अप्रैल तक भारत में रहने का समय दिया गया। इस संदर्भ में, मारिया को भी वापस पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया था।
इस पर मारिया ने स्पष्ट किया कि उनके लॉन्ग टर्म वीजा पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सरकार द्वारा नए आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा, “मैं समझ नहीं पा रही हूं कि मुझे क्या करना चाहिए। मैं अपने पति और घर को छोड़कर नहीं जा सकती।” उनके पति, सोनू मसीह ने कहा कि उन्होंने मारिया को यहां लाने में काफी मेहनत की थी। उन्होंने कहा, “मैंने तीन साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद वीजा हासिल किया। अब सरकार कह रही है कि उसे वापस जाना होगा, जो मेरे लिए अत्यंत कठिन है।”
इस स्थिति में, गुरदासपुर के एक सामाजिक कार्यकर्ता मकबूल चौधरी ने भी इस दंपती के लिए सहायता मांगी है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार से अपील है कि ऐसे पारिवारिक मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। पति-पत्नी को अलग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वे केवल एक साथ शांति से जीना चाहते हैं।” वहीं, काहनूवान थाना के SHO कुलविंदर सिंह ने भी इस मामले पर टिप्पणी की कि जब से सरकार ने फैसला लिया है, तब से मारिया को पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया था, लेकिन वह खुद ही इस विषय पर स्थिति स्पष्ट कर रही थीं।
इस मामले ने जहां एक तरफ नीतिगत दृष्टिकोण को उजागर किया है, वहीं यह एक मानवीय पहलू पर भी विचार करने की आवश्यकता बताता है, जहां दंपती की भावनाएँ और उनकी परिस्थिति दोनों महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार के मामलों में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि किसी का भी जीवन प्रभावित न हो।









