कपूरथला की महिला का अमेरिकी रिफ्यूजी कैंप में रहस्यमय अनुभव: वीजा न मिलने से गैरकानूनी तरीका अपनाया!
अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति के तहत डिपोर्ट किए गए भारतीय नागरिकों में से कपूरथला के तीन लोग अंततः अपने घर वापस लौट आए हैं। इनमें 30 वर्षीय लवप्रीत कौर और उनके 10 वर्षीय पुत्र प्रभजोत सिंह, साथ ही गांव बरियार के निवासी हरप्रीत सिंह शामिल हैं। लवप्रीत कौर ने बताया कि वह अपने बेटे के साथ 1 जनवरी 2025 को यूरोप होते हुए अमेरिका पहुंची थी। वे 27 जनवरी को एक अमेरिकी रिफ्यूजी कैंप में दाखिल हुए, लेकिन वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। बाद में, अमेरिकी सेना के विमान द्वारा उन्हें 5 फरवरी को अमृतसर भेज दिया गया। यह सब कुछ अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति के चलते हुआ।
श्री गुरु रामदास अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 104 भारतीयों को भेजा गया, जिनमें से कपूरथला जिले के 6 लोग थे। यह सभी लोग अमेरिका जाने के लिए 40 से 50 लाख रुपए खर्च कर चुके थे। उनमें से अधिकांश लोग एक महीने पहले ही अमेरिका पहुंचे थे और उन्हें रिफ्यूजी कैंप में रखा गया था। लवप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने अमेरिका जाने के लिए दो बार वैध तरीके से वीजा आवेदन किया था, लेकिन विफल रहने के बाद उन्होंने अवैध तरीके से अमेरिका जाने का रास्ता चुना।
डिपोर्टेशन की कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने डिपोर्ट किए गए लोगों को अमृतसर एयरपोर्ट से उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने का काम किया। विशेष रूप से, भुलत्थ के डीएसपी दलजीत सिंह और करनैल सिंह ने इस प्रक्रिया का नेतृत्व किया। इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि अवैध तरीके से विदेश जाने की कोशिश करने वाले लोगों के लाखों रुपए बर्बाद हो गए हैं। लवप्रीत कौर ने जानकारी दी कि उन्हें और उनके बेटे को अमेरिका में डिपोर्ट कर दिए जाने के बाद 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
इस चौंकाने वाली स्थिति के बारे में बताते हुए लवप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें रिफ्यूजी कैंप में अन्य 103 लोगों के साथ बंद कर दिया गया था। उनकी व्यक्तिगत चीजें, जैसे फोन और ज्वेलरी, भी ले ली गईं और उन्हें बेड़ियों में जकड़ा गया। उन्होंने बताया कि उन्हें यह नहीं पता चला कि उन्हें भारत वापस भेजा जा रहा है और इस विषय पर उन्होंने अपनी यात्रा के एजेंट का नाम बताने से भी इनकार कर दिया।
गांव बरियार के दो युवक अमन और हरमनप्रीत सिंह ने भी मीडिया के समक्ष आने से मना कर दिया, लेकिन उन्होंने यह संकेत दिया कि उन्होंने भी लाखों रुपये खर्च कर अवैध तरीके से अमेरिका जाने की कोशिश की थी। अब, यह घटना उन सभी के लिए चेतावनी है जो अवैध इमिग्रेशन का रास्ता अपनाने की सोचते हैं, क्योंकि इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि भावनात्मक और मानसिक पीड़ा भी होती है।









