जलालाबाद पंचायत में नशे पर बवाल: सचिव भागे, ग्रामीणों की बीडीपीओ से शिकायत!

फाजिल्का के जलालाबाद क्षेत्र में स्थित गांव बल्लूआना में एक पंचायत की मीटिंग के दौरान नशे की समस्या पर चर्चा के समय हंगामा खड़ा हो गया। यह हंगामा इतना बढ़ गया कि पंचायत सचिव निशा और सरवान सिंह को बैठक को बीच में ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद, गांव के लोगों ने बीडीपीओ के पास जाकर इन अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई, जिससे मामला और बढ़ गया। पंचायत सचिव सरवान सिंह का कहना है कि बैठक में नशे के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हुआ, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। उन्होंने साफ किया कि बैठक में न तो कोई प्रस्ताव पारित किया गया था और न ही इसकी कोई लिखित रसीद थी।

इस हंगामे की घटना पर ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका आरोप है कि सरवान सिंह वास्तव में गांव के सचिव नहीं हैं और पहले भी उन्हें इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा है। वहीं, गांव के पूर्व सरपंच और अन्य स्थानीय लोगों ने साफ़ कहा कि सरपंच और पंचायत के सदस्यों की उपस्थिति में कई प्रस्ताव प्रस्तावित किए गए थे। जब गांव के लोग पंचायत सचिव से उन प्रस्तावों के बारे में पूछते हैं या सुनने की मांग करते हैं, तो सचिव ने वहां से चले जाने का निर्णय लिया।

गांव की स्थिति को देख कर ऐसा लगता है कि पंचायत में भारी असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव निशा मुख्य रूप से मीटिंग में आई थीं, जबकि सरवान सिंह की गांव में कोई स्थायी ड्यूटी नहीं है। यह स्थिति पंचायत के अंदर पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी को दर्शाती है। बीडीपीओ गुरजिंदर सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और इसकी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला वास्तव में क्या है।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन के कार्यों पर सवाल उठाए हैं और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्यों पंचायत की बैठकों में इस तरह का हंगामा हो रहा है। समाज में नशे की समस्याओं पर चर्चा करना जरूरी है, लेकिन ऐसा माहौल नहीं बनाना चाहिए कि लोग अपनी ही आवाज नहीं उठा सकें। पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा सही ढंग से की जा सके।

इसी बीच, ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे चाहते हैं कि उनकी समस्या का समाधान निकाला जाए। यह स्थिति यह भी दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता है और प्रशासन को हर स्तर पर लोगों की आवाज सुनने की आवश्यकता है।