SAD की अहम बैठक: सुखबीर बादल के इस्तीफे पर चर्चा, कई दिग्गज नेता शामिल!

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की वर्किंग कमेटी की बैठक चंडीगढ़ में शुरू हो गई है। इस बैठक की अध्यक्षता कार्यवाहक प्रधान बलविंदर सिंह भूंदड़ कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के इस्तीफे से संबंधित निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, पार्टी के सदस्यता अभियान को लेकर नई रणनीतियों पर भी चर्चा की जाएगी। मीटिंग में सुखबीर बादल भी मौजूद हैं, जो खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

बैठक की जानकारी डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने दो दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थी। इस बैठक के पहले, उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से मुलाकात की थी, जिसके बाद एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी से भी मिली। इस मुलाकात के दौरान जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि पार्टी को अकाल तख्त के आदेशों का पूर्ण पालन करना होगा।

सुखबीर बादल पहले ही शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा पेश कर चुके हैं। 2 दिसम्बर को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कार्यकारिणी को निर्देश दिए गए थे कि वे इस्तीफे को स्वीकार करें और इस मामले को अकाल तख्त सचिवालय को सूचित करें। हालांकि, पार्टी के नेताओं ने धार्मिक सेवाओं के संदर्भ में कार्यकारिणी बैठक के लिए थोड़ा समय मांगा था, जो कि स्वीकार कर लिया गया। सुखबीर बादल का इस्तीफा एसजीपीसी के साथ हुई बैठक में भी चर्चा का मुख्य विषय रहा है।

यह बैठक न सिर्फ अध्यक्ष के इस्तीफे पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि नए साल में पार्टी के लिए सदस्यता अभियान शुरू करने की योजना तैयार करने के लिए भी है। पार्टी के नेतृत्व द्वारा यह निर्णय लिया जाएगा कि किन कार्यकर्ताओं और व्यक्तियों को सदस्य बनाया जाएगा, जो जमीनी स्तर पर वफादार और भरोसेमंद हों। सुखबीर बादल का अध्यक्ष पद का कार्यकाल 14 दिसम्बर को समाप्त हो जाएगा, और इस बैठक से उम्मीद की जा रही है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा।

सुखबीर बादल के इस्तीफे को स्वीकार करने की प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाएगा कि पार्टी श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का पालन कर रही है। यदि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, तो इससे जनमानस और सिख समुदाय में यह संदेश जाएगा कि अकाली नेतृत्व धार्मिक अनुशासन का पालन नहीं कर रहा है। ऐसे में, आगामी दिनों में पार्टी के आंतरिक मामलों में सुधार की दिशा में यह बैठक एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो कि सिद्धांतों और धर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाएगी।