अमृतसर में किसानों का उग्र विरोध: एक लाख पर्यटक फंसे, बस-रेलवे स्टेशन ठप!
किसान संगठनों के आवाहन पर आज पंजाब में “पंजाब बंद” के दौरान अमृतसर शहर में लगभग 32 स्थानों पर किसान नेताओं ने प्रदर्शन किया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी संस्थानों को बंद रखा जाए, क्योंकि केंद्र सरकार विकास की दिशा में सभी वर्गों पर हमले कर रही है। अमृतसर के विभिन्न इलाकों जैसे कोटला गुजरान, पंधेर कलां, वडाला नंगल पानवा, जहांगीर रेलवे लाइन, टाहली साहिब अड्डा और कई अन्य स्थानों पर किसान एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
किसान नेताओं द्वारा दक्षिण गारंटी कानून की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। उन्होंने दुकानदारों और अन्य व्यवसायों से अपील की है कि वे उनके साथ खड़े हों क्योंकि सरकार केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर भी अत्याचार कर रही है। इस सरकार की नीतियों के चलते छोटे व्यवसाय खत्म होते जा रहे हैं, जबकि ऑनलाइन व्यापार को तरजीह दी जा रही है, जिससे बड़े उद्योगों को लाभ हो रहा है। किसान संगठनों का मानना है कि इस स्थिति का सामना करने के लिए एकजुटता आवश्यक है।
अमृतसर में, जहां प्रतिदिन लगभग एक लाख पर्यटक आते हैं, वहां इस बंद के कारण असुविधा उत्पन्न हुई है। खासकर छुट्टियों के दौरान, इस संख्या में इजाफा हो जाता है, जिससे दुकानदारों और टूरिस्टों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि खाने की कोई कमी नहीं है, क्योंकि गुरु का लंगर हमेशा उपलब्ध है, लेकिन यहाँ तक कि छोटी-छोटी आवश्यकताएँ पूरी करने में भी समस्याएँ आ रही हैं। यातायात के बंधन और बंद से आने वाले पर्यटक भी परेशान हैं, जो इस शहर की जीवंतता को प्रभावित करता है।
किसानों के इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करना और उनकी आवाज को उठाना है। पंधेर ने सभी वर्गों से आह्वान किया है कि वे किसानों के आंदोलन में भाग लें और सरकारी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। अगर लोग इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो इसे और भी गंभीर समस्या बन सकती है।
इन प्रदर्शन स्थलों पर किसानों का संकलन दर्शाता है कि उनकी संगठित शक्ति और एकजुटता किसी भी तरह के अत्याचार के खिलाफ खड़ी हो सकती है। इस प्रकार के आंदोलनों से ये साबित होता है कि किसान केवल अपने हक के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज के हक के लिए भी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह न केवल किसानों की, बल्कि छोटे व्यवसायियों की भी पुकार है, जो इस समस्या से जूझ रहे हैं। इस बंद से जुड़ी चुनौतियाँ और समर्थन दोनों ही समाज के समक्ष एक महत्वपूर्ण बात रखती हैं।









