अमृतसर मेयर चुनाव में निर्दलीय बने किंगमेकर, कांग्रेस और AAP में खींचतान तेज!
नगर निगम चुनाव के बाद अब मेयर पद के लिए राजनीतिक स्थिति में लगातार बदलाव आ रहा है। कांग्रेस पार्टी को केवल बहुमत पाने की चुनौती ही नहीं है, बल्कि आम आदमी पार्टी (आप) के बढ़ते प्रभाव ने भी इसे और मुश्किल बना दिया है। इस नगर निगम में कुल 85 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 46 पार्षदों की आवश्यकता होगी। इस गणना में वर्तमान पार्षदों की स्थिति और संभावित राजनीतिक गठबंधन ने इस चुनाव को न csak आकर्षक, बल्कि जटिल भी बना दिया है। कांग्रेस के नेता हालांकि यह दावा कर रहे हैं कि मेयर का चयन हाईकमान द्वारा किया जाएगा, लेकिन बहुमत हासिल करने के संदर्भ में कोई स्पष्ट रुख अपनाने को तैयार नहीं है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के पास वर्तमान में 24 पार्षद हैं और उसके पास 5 विधायकों का भी समर्थन है। कांग्रेस जिन 8 विधायकों के समर्थन की बात कर रही है, उनमें से कई लोग मौजूदा आप सरकार के खिलाफ जाने से हिचकिचा रहे हैं। इस कारण से, कांग्रेस के लिए 40 से अधिक सीटों तक पहुंचना कठिन हो रहा है। 2022 के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने अपने प्रभाव का प्रदर्शन करते हुए अमृतसर नगर निगम को कांग्रेस से छीन लिया था, फिर भी इस बार आप उसी रणनीति को अपनाने की सोच रही है।
आप के पास 2022 में एक भी मेयर नहीं था, लेकिन उस समय भी उसने तत्कालीन मेयर करमजीत सिंह रिंटू को अपने साथ मिलाकर अपना प्रभाव बढ़ा लिया था। अब, आप अपनी ताकत बढ़ाने के लिए निर्दलीय पार्षदों और अकाली दल के उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने के लिए प्रयासरत है। इसके साथ, आप कांग्रेस के कुछ पार्षदों को भी अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है, जो सत्ता और पद की लालसा में हैं। ऐसा करके आप 37 पार्षदों का समर्थन हासिल कर सकती है और फिर बहुमत की ओर बढ़ने की योजना बना रही है।
कांग्रेस के पास फिलहाल 40 पार्षद हैं, लेकिन उसे भी निर्दलीय और छोटे दलों के समर्थन की आवश्यकता है। कांग्रेस को तीन बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है: पहला, पार्टी के भीतर आपसी सामंजस्य की कमी, दूसरा, विपक्षी दलों का बढ़ता प्रभाव, और तीसरा, मेयर का चुनाव कराने की प्रक्रिया में राजनीतिक जोड़-तोड़ की जटिलता। कांग्रेस के सामने यदि वह सफल होना चाहती है, तो उसे अपनी रणनीति को मजबूत करने और गठबंधन की संभावनाओं पर सही से काम करने की जरूरत है।
इस प्रकार, नगर निगम चुनाव के फलक पर संघर्ष तेज होता जा रहा है। सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं और यह देखा जाना बाकी है कि कौन सी पार्टी मेयर की गद्दी पर काबिज होने में सफल होती है। इस चुनाव का परिणाम न केवल राजनीति की दिशा में महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह स्थानीय मुद्दों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









