पंजाब बंद के चलते PU की 30 दिसंबर की परीक्षाएं 31 दिसंबर को होंगी!
पंजाब यूनिवर्सिटी ने 30 दिसंबर को किसानों के द्वारा किए गए पंजाब बंद की घोषणा के मद्देनजर अपनी परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि अब 30 दिसंबर को होने वाली सभी परीक्षाएं 31 दिसंबर, मंगलवार को आयोजित की जाएंगी। पहले से निर्धारित परीक्षाएं पाकिस्तान यूनिवर्सिटी और संबद्ध कॉलेजों में सोमवार को होनी थीं, लेकिन अब उन्हें रद्द कर दिया गया है।
किसानों के संगठन किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) द्वारा 30 दिसंबर को पंजाब बंद का ऐलान किया गया था। इस फैसले के बाद, किसानों की बैठक में उल्लिखित किया गया कि सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक बसों और ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से बंद रहेगा। इस दौरान सभी सरकारी और निजी संस्थान भी बंद रहेंगे। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से आए नेताओं और संगठनों ने इस बंद में समर्थन देने का निश्चय किया। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बैठक के बाद कहा कि सड़क और रेल यातायात के लिए यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
इस बीच, 70 वर्षीय किसान नेता जगजीत डल्लेवाल 33 दिनों से अनशन पर हैं और उन्होंने न केवल अन्न का सेवन रोक दिया है, बल्कि अब वे पानी भी नहीं पी रहे हैं। उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है, क्योंकि पानी पीने पर उन्हें उल्टियां आ रही हैं। उनके साथी किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ का कहना है कि उनका ब्लड प्रेशर 88/59 तक गिर चुका है, जो सामान्य से काफी कम है। 60 वर्ष से अधिक आयु के लिए सामान्य ब्लड प्रेशर 133/69 माना जाता है। डल्लेवाल की इम्यूनिटी भी बीते दिनों में काफी कमजोर पड़ चुकी है, फिर भी उन्होंने चिकित्सकीय उपचार लेने से इनकार कर दिया है।
इन सभी घटनाक्रमों ने पंजाब में एक बार फिर किसानों के आंदोलन को चर्चा में ला दिया है। किसानों का यह प्रतिरोध कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा है, और उनकी एकजुटता दर्शाती है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। पंजाब बंद का यह निर्णय केवल किसान संगठनों द्वारा लिए गए प्रस्ताव का एक हिस्सा है, जिससे यह साबित होता है कि किसानों का यह संघर्ष लंबा चलने वाला है।
युवाओं और विद्यार्थियों पर इस बंद का प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि उन्हें परीक्षा में शामिल नहीं होने का दुख सहन करना पड़ेगा। इस स्थिति से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों और संस्थानों को अधिक लचीलापन और अद्यतन योजनाएं बनानी होंगी ताकि छात्रों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े। किसानों का आंदोलन और इसके पीछे के कारणों पर सामूहिक विचार विमर्श और समझौता होना आवश्यक है ताकि आगे की समस्याओं का समाधान हो सके।









