भगत सिंह को आंतकवादी बताने पर पाक में बवाल, फाउंडेशन ने किया कड़ा विरोध!
**अमृतसर: शहीद भगत सिंह को आतंकवादी कहने का मामला गरमााया**
पाकिस्तान के लाहौर स्थित शादमान चौक का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने को लेकर चल रहे अदालती विवाद के बीच एक नया मोड़ आ गया है। जिला प्रशासन की तरफ से अदालत में भगत सिंह को ‘आतंकवादी’ कहने के मामले ने सरहद पार की स्थिति को और भी संवेदनशील बना दिया है। इस महत्वपूर्ण अदालत की सुनवाई में अधिकारी तारिक मजीद द्वारा की गई टिप्पणी पर भगत सिंह मैमोरियल फाउंडेशन ने कड़ा विरोध जताया है। इस फाउंडेशन के चेयरमैन एडवोकेट इम्तियाज राशिद कुरैशी ने इस टिप्पणी को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
ज्ञात हो कि शादमान चौक वही स्थान है जहां पहले लाहौर जेल स्थित थी और यहीं पर स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। आजादी के बाद इस पूर्व जेल के स्थान पर एक नई इमारत का निर्माण किया गया था और उसे शादमान चौक के नाम से जाना गया। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के विरुद्ध की गई न्यायिक कार्यवाही को गलत ठहराने एवं उन्हें बेगुनाह साबित करने जैसी कानूनी लड़ाई फाउंडेशन द्वारा लड़ी जा रही है। इसके अलावा चौक का नामकरण भी इस फाउंडेशन के प्रमुख प्रयासों मे शामिल है।
इम्तियाज राशिद कुरैशी ने अदालत की तरफ से बार-बार के आदेशों को नजरअंदाज करने और प्रशासन द्वारा नामकरण में हो रही देरी पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस बार की सुनवाई के दौरान विशेषकर सरकारी कार्यकर्ता द्वारा भगत सिंह को आतंकवादी कहने की बात ने सभी सीमाओं को पार कर दिया है। उनकी यह टिप्पणियाँ न केवल अवैज्ञानिक हैं, बल्कि यह शहीदों का अपमान भी करती हैं। कुरैशी ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई में भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी का विशेष योगदान है और आज हम सभी उनकी शहादत के कारण ही आजादी का अनुभव कर रहे हैं।
फाउंडेशन का यह भी कहना है कि आज कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता के लिए अनर्गल बयानों का सहारा ले रहे हैं, जो न केवल उनकी खुद की छवि को खराब करता है, बल्कि शहीदों के प्रति अपमानजनक भी है। कुरैशी ने इस संदर्भ में ये भी कहा कि कोई भी व्यक्ति भगत सिंह की सच्चाई और महानता से कहीं अधिक नहीं है। ऐसे बेतुके बयान केवल सत्ता की भूख या पहचान की तलाश में दिए जा रहे हैं, जो हमारी आज़ादी के नायकों की विरासत का मंथन करते हैं।
इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और विवाद का हल क्या निकलता है, यह देखना बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि शहीद भगत सिंह का नाम केवल भारतीय इतिहास में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण है। फाउंडेशन की आशा है कि जल्द ही इस मामले का समाधान निकलेगा और शादमान चौक का नामकरण शहीद भगत सिंह के नाम पर होगा।









