बागी अकालियों के आरोपों पर धामी की तीखी प्रतिक्रिया!
**अमृतसर: अकाली दल के भीतर चल रहे विवाद के बीच SGPC के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बागी नेताओं के आरोपों को सिरे से नकार दिया है।** उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अकाली सुधार लहर का हिस्सा बनकर बागी हुए हैं, वे बेवजह आरोप लगा रहे हैं। धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुखबीर सिंह बादल के संबंध में जो दबाव बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से निराधार हैं। उनके अनुसार, “दबाव हम नहीं, बल्कि बागी खुद सुखबीर के खिलाफ दबाव बना रहे हैं।”
मंगलवार को हुई SGPC कार्यकारिणी की पहली बैठक के तुरंत बाद धामी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पहले जब सभी नेता एक साथ थे, तब किसी ने इस प्रकार के आरोप नहीं लगाए। उनका आरोप है कि बागी अपने अलगाव के बाद अकाली दल की एकता को तोड़ने के लिए ऐसे झूठे आरोप प्रस्तुत कर रहे हैं। धामी ने कहा, “अगर विचार करें तो आज जो लोग अलग हुए हैं, वे भी पहले सुखबीर के साथ थे। अब वे केवल विवाद पैदा करने के लिए आरोप लगा रहे हैं।”
**धामी ने यह भी कहा कि सिंह साहिबान से मिलना कोई अनैतिक कार्य नहीं है।** चूंकि वे सिख समुदाय के नेता हैं, इसलिए उनके साथ बैठकें की जाती हैं ताकि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा सके। धामी ने किसी पर भी बेवजह आरोप लगाने से बचने की बात करते हुए कहा कि SGPC हमेशा एकजुटता की पक्षधर रही है और किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए तत्पर है।
धामी के बयान से यह स्पष्ट है कि वह बागी नेताओं पर जोर देकर अपनी स्थिति को मज़बूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वक्त में सुखबीर को उचित निर्णय लेना है और SGPC उनके फैसले का सम्मान करती है। इस विवाद में धामी का यह दो टूक बयान न केवल SGPC की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि अकाली दल के भीतर एकजुटता बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं।
इस तरह का विवाद अकाली दल के इतिहास में नया नहीं है, लेकिन इस बार धामी ने बागियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्होंने अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। आगे देखने पर, यह देखना होगा कि बागी नेता इस स्थिति का सामना कैसे करते हैं और क्या अकाली दल अपनी एकता बनाए रख सकेगा या नहीं। फिलहाल, SGPC प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने अपनी स्पष्टता से स्थितियों को संभालने का प्रयास किया है और समय ही बताएगा कि आगे क्या घटनाक्रम होता है।









