पटियाला: पराली जलाने पर 8 पर केस, पुलिस कर रही आरोपियों की पहचान!
हाल के दिनों में जिले में पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है, हालांकि प्रशासन ने इस पर रोक लगाने के लिए कई पाबंदियां भी लगाई हैं। एक ही दिन में 8 अलग-अलग स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन की चिंताएँ और बढ़ गई हैं। पुलिस ने इन मामलों की जांच करते हुए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जुल्का पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में चार मामले, जबकि सनौर और नाभा में एक-एक और सदर पटियाला पुलिस स्टेशन के इलाके में दो मामले सामने आए हैं। अब पुलिस इन खेतों के मालिकों की पहचान कर रही है ताकि उन्हें कानूनी कार्यवाई का सामना करना पड़े।
21 अक्टूबर को, जिले में प्रदूषण फैलाने वाले पराली जलाने के 39 मामलों में पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे। इसके अलावा, 20 अक्टूबर को जिले में 39 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाओं की जानकारी मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। इससे पहले 19 अक्टूबर को भी 13 मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की थी। ये सभी मामले जलती हुई पराली से प्रदूषण फैलाने वाले खेतों के मालिकों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। संबंधित इलाके की पुलिस ने सभी घटनाओं में खेतों के मालिकों की पहचान करने का प्रयास शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें उचित सजा मिल सके।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि parali जलाने से होने वाले प्रदूषण का प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है और यह गंभीर समस्या बन गई है। इस संदर्भ में विभिन्न प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि इस अवैध क्रियाकलाप को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। फिलहाल, पुलिस खेतों के मालिकों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है और कोशिश की जा रही है कि आग लगाने वाले व्यक्तियों की स्पष्ट पहचान की जा सके। इसके बाद न केवल उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उन्हें आर्थिक दंड भी दिया जाएगा।
इस स्थिति में आम जनता से भी सहयोग की अपील की गई है कि वे पराली जलाने की घटनाओं के बारे में प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की जागरूकता और सहयोग इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही, पराली प्रबंधन के बेहतर विकल्पों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि किसान बिना पराली जलाए अपनी फसल के बाद की समस्याओं का सामना कर सकें।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सार्थक चेतावनी दी जा रही है, जिसमें कहा गया है कि यदि खेतों के मालिकों ने अपनी जमीन पर अवैध रूप से पराली जलाना जारी रखा तो उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की योजना है कि कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को पराली प्रबंधन के नए तरीके सिखाए जाएं, जिससे वे पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ-साथ अपने आर्थिक हितों की भी रक्षा कर सकें।









