अबोहर दाना मंडी में धान खरीद पर हंगामा: किसानों का शैलर मालिकों पर गुस्सा!

अबोहर की दाना मंडी में किसानों ने धान की फसल नहीं खरीदने के खिलाफ आज एक जोरदार धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन किसान यूनियन नेताओं और किसानों द्वारा मार्केट कमेटी कार्यालय के समक्ष आयोजित किया गया। इस दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर उन्होंने कम पानी में उगने वाली धान की हाईब्रेड फसल लगाई थी। अब जब फसल पककर तैयार है और उन्हें इसे बेचने के लिए मंडी में लाना पड़ा है, तब शैलर मालिक अपनी खरीददारी से मुकर रहे हैं। इस स्थिति ने किसानों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, यदि कोई शैलर उनके धान की फसल को खरीदने के लिए तैयार होता है, तो भी उसकी फसल पर कटौती की जा रही है, जिसका कोई न्यायसंगत कारण नहीं है। किसानों का यह भी कहना है कि मार्केट कमेटी और स्थानीय प्रशासन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि उन्हें ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, अन्यथा वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

इसी विषय में मार्केट कमेटी के सचिव बलजिदर सिंह ने कहा कि उनके पास किसी भी किसान की ओर से इस मामले में लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “यदि कोई किसान लिखित में अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो उस पर तुरंत और उचित कार्रवाई की जाएगी।” ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन की ओर से किसानों की परेशानियों को हल करने के लिए सक्रिय कदम उठाने में देरी हो रही है, जिससे किसानों के बीच और भी निराशा बढ़ रही है।

यह घटना न केवल किसानों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रदर्शित करती है कि कैसे स्थानीय प्रशासन और मार्केट कमेटियाँ किसानों की समस्याओं के प्रति लापरवाह बनी हुई हैं। किसानों के इस प्रदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने हक के लिए लड़ने को तत्पर हैं और यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियाँ न केवल क्षेत्र के किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती हैं, बल्कि यहां की कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं।

किसानों की यह समकालीन समस्या दर्शाती है कि ऐसे मुद्दों पर गहन विचार और त्वरित कार्रवाई कितनी आवश्यक है। किसानों का संघर्ष, उनकी समस्याओं और उनके अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है, अगर स्थानीय प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान खोजने में सक्रियता दिखाए। अब देखना यह है कि प्रशासन और मार्केट कमेटी इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और किसानों की पीड़ा को किस तरह समझते हैं।