राम रहीम ने पंजाब सरकार पर लगाए आरोप, सुप्रीम कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण!
पंजाब सरकार की ओर से दायर याचिका के जवाब में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया है। डेरा प्रवक्ता का बयान है कि सुप्रीम कोर्ट में वे अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगे। उनका कहना है कि पंजाब सरकार की याचिका में कई अधूरे तथ्यों को पेश किया गया है, जिस पर डेरा जल्द ही कानूनी प्रतिक्रिया देगा। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि जब हाईकोर्ट में सभी तथ्यों को रखा गया था, तो अदालत ने इन मामलों पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें राम रहीम के खिलाफ 2015 में हुए गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में ट्रायल पर रुकावट डाली गई थी। यह मामला 2021 से चल रहा है, जब राम रहीम ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने तीन अलग-अलग घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम रहीम को आरोपी बनाया था, जिस पर उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी।
हाईकोर्ट द्वारा 6 सितंबर, 2018 को जारी अधिसूचना पर भी राम रहीम ने सवाल उठाया था, जिसमें राज्य ने अपनी सहमति वापस ले ली थी। उन्होंने याचिका में अनुरोध किया था कि सीबीआई को इन मामलों की जांच जारी रखने का निर्देश दिया जाए। इस साल मार्च में, हाईकोर्ट ने इस याचिका को बड़ी बेंच के पास भेज दिया था, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या राज्य सरकार अपनी सहमति को वापस ले सकती है। पंजाब सरकार ने इस मुद्दे पर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश सही है और इसे उचित ठहराने की बात कही। वहीं, राम रहीम के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल वही किया है जो राज्य सरकार ने मांगा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला दो अलग-अलग तरह के मुद्दों से संबंधित है – एक पुलिस गोलीबारी से जुड़ा हुआ और दूसरा बेअदबी से।
इस मामले का विवाद बढ़ने के कारण पंजाब में सामाजिक और राजनीतिक तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया था। 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति अपवित्रता की कई घटनाएं हुई थीं, जिनमें से एक फरीदकोट के गुरुद्वारे से पवित्र ग्रंथ की चोरी थी। इसके बाद त्वरित विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को बड़ा दबाव में ला दिया, और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे कई लोगों की जान गई। इन सभी घटनाओं के बाद सीबीआई ने अपनी जांच शुरू की थी, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पाया गया।
उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के आने वाले निर्णय इस मामले की जटिलताओं को स्पष्ट करने में सहायता करेंगे और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को मिले निर्दोषता के दावों पर आवश्यक निर्णय देंगे। इस मामले की सुनवाई और उसके परिणाम राज्य में आम जनता की दृष्टि में महत्वपूर्ण होने की संभावना है।









