होशियारपुर पंचायत चुनाव: हारे उम्मीदवार के समर्थकों का उत्पात, जनता घरों में कैद!
पंजाब के होशियारपुर जिले के मुकेरियां हल्के के चरेडीयां गांव में पंचायत चुनाव के बाद से पिछले तीन दिनों से गुंडागर्दी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके कारण गांव में भय का माहौल व्याप्त है। पंचायत चुनाव में हार का सामना करने वाले उम्मीदवारों के समर्थक जीते हुए उम्मीदवारों के प्रति लगातार हिंसक रवैया अपनाए हुए हैं। स्थानीय निवासी इस स्थिति की शिकायत कर रहे हैं कि वे न तो अपने काम पर जा पा रहे हैं और न ही सुरक्षित रूप से अपने घरों से बाहर निकल पा रहे हैं। इस दौरान कुछ साक्षात्कार भी सामने आए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि गुंडे धारदार हथियारों के साथ घूम रहे हैं और स्थानीय लोगों के साथ मारपीट कर रहे हैं।
इस घटना को लेकर एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि कैसे कई लोग एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति और भी बदतर हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस की शिकायत के बाद भी आरोपी बेखौफ होकर गांव में घुम रहे हैं और उन्हें धमकी दे रहे हैं। इस स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए पुलिस प्रशासन चरेडीयां गांव में पहुंचा, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने उनकी सुनवाई नहीं की और सिर्फ खानापूर्ति कर वापस चली गई।
नव नियुक्त सरपंच सन्नी भारद्वाज और अन्य ग्रामीणों ने इस मामले में 15 तारीख को मतदान के दिन हुई घटनाओं का जिक्र किया, जब विरोधी पक्ष ने मतदान केंद्र के बाहर कुर्सियों को लगाने से रोका था, जिसके कारण विवाद हो गया। आरोपियों ने एक स्थानीय व्यक्ति को थप्पड़ मारा और इसके बाद स्थिति बिगड़ गई। फिलहाल, स्थानीय नेता और ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार और पुलिस प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की लापरवाही से उनपर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, उनकी कई शिकायतें थाना हाजीपुर में दर्ज कराई गई हैं, लेकिन पुलिस की अनदेखी ने मामला और भी जटिल बना दिया है। डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने कहा है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और चुनाव के दिन हुए विवाद की जांच एमएलआर के तहत की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर मामले की जांच की जा रही है और संबंधित पुलिस की ड्यूटी भी लगाई गई है। फिर भी, गाँव के लोग इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है बल्कि ग्रामीण राजनीति में भी नए विवादों को जन्म दे सकता है।









