मानसा में रजवाहा टूटा: खेतों में पानी से फसलें बर्बाद, विभाग पर सफाई का आरोप!
मानसा जिले के नंगल कलां गांव में हाल ही में एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है, जिसमें स्थानीय रजवाहे की पटरी टूटने से किसानों की धान की फसल पानी में डूब गई है। यहां के किसान, जिनमें लाभ सिंह, विक्की, सुखविंदर सिंह और जस्सा सिंह शामिल हैं, इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि फसल की कटाई का समय आ चुका था, लेकिन अब ये फसल पानी में डूब गई है, जिससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार, रजवाहे की सफाई न होने के कारण इसकी पटरी में दरार पड़ गई। सुबह करीब 20 फीट की दरार पड़ने से रजवाहे में कटाव हो गया, जो कि स्थानीय कृषि के लिए अत्यंत विपरीत स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए बनाए गए रजवाहे के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है। इससे न केवल उनकी धान की फसल को नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे कृषि उत्पादन भी प्रभावित होना तय है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि रजवाहे की जल्दी मरम्मत की जाए। उनका कहना है कि फसल के कटाई के समय पानी भर जाने से न केवल उनके फसल का नुकसान होगा, बल्कि इससे फसल की झाड़ी भी प्रभावित होगी। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि फसल के गिरने से उसका उत्पादन कम हो जाता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में तत्काल सहायता की आवश्यकता है, ताकि किसान बड़े नुकसान से बच सकें।
स्थानीय किसान प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि तुरंत प्रभाव से रजवाहे की मरम्मत की जाए, ताकि किसानों की बर्बाद होती फसल को बचाया जा सके। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि गतिविधियों को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी। नंगल कलां के किसानों ने यह स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्रता से कदम नहीं उठाए गए, तो उनकी मेहनत का फल बर्बाद हो जाएगा।
इस संकट के समय में, स्थानीय सरकार और सिचांई विभाग की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की मदद को आगे आएं और उचित कदम उठाते हुए रजवाहे की स्थिति को बेहतर बनाएं। किसानों की चिंताओं को सुनकर ही समाधान निकाला जा सकता है, जिससे ना केवल उनकी फसलें बचेंगी, बल्कि उनका विश्वास प्रशासन पर भी स्थिर रहेगा। इसलिए, इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए।









