होशियारपुर में पटवारी-गरदावर का विरोध: उम्मीदवार के घर पर बवाल!

पंजाब के होशियारपुर स्थित मुकेरियां के गांव कौलपुर में हाल में एक तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा, जब सरपंच पद के एक उम्मीदवार के घर सरकारी भूमि पर कब्जे की जांच के लिए सरकारी अधिकारी पहुंचे। यह घटना उस समय हुई जब गांव के निवासियों ने अधिकारियों का जोरदार विरोध किया। ऐसा आभास हुआ कि स्थानीय लोगों में घबराहट और असंतोष था, जिसके परिणामस्वरूप पटवारी और गरदावर बिना किसी निशानदेही के अपनी जगह लौट गए।

सरपंच पद के उम्मीदवार मलकीत सिंह ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास किसी भी प्रकार का सरकारी भूमि पर कब्जा नहीं है और न ही कोई विवाद का मामला है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि किसे जाने पर और क्यों, उन्हें दशहरे की छुट्टी वाले दिन जब लोग पर्व मना रहे थे, अधिकारियों द्वारा खींचतान की गई। मलकीत सिंह के मुताबिक, बीडीपीओ मुकेरियां के पटवारी और गरदावर उनके घर की जांच करने आए और उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने सरकारी जमीन पर गैरकानूनी रूप से घर बना रखा है।

मलकीत सिंह के अनुसार, गांव के सभी निवासियों का समर्थन उनके पक्ष में है, लेकिन विपक्षी पार्टी की चालबाजी के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है। गांववासियों ने इस धक्केशाही के खिलाफ आवाज उठाई है और पंजाब सरकार से मांग की है कि इस प्रकार के दबाव बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। गांव के निवासियों का मानना है कि ऐसे अधिकारियों का औपचारिक रूप से जिम्मेदारी से पेश आना चाहिए और उन्हें गलत तरीके से उत्पीड़न करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी अधिकारियों के जनसाधारण के साथ संबंधों पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि उन्हें अपने अधिकारों और न्याय की रक्षा करने का पूरा हक है। इस तरह की घटनाएं न केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों में असंतोष और अविश्वास का माहौल भी पैदा कर सकती हैं। भारतीय लोकतंत्र में, नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे अपनी आवाज उठाएं और नकारात्मक प्रवृत्तियों का विरोध करें।

वास्तव में, यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन के तंत्र और उनकी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान आकर्षित करता है। गांव के निवासी धर्मवीर ने कहा कि उन्हें अपने प्रतिनिधियों से यह उम्मीद है कि वे उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे और किसी भी अनैतिक कार्रवाई के खिलाफ खड़े होंगे। ऐसे में देखा जाना है कि क्या राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करती है या नहीं।