पंजाब के 50 हेडमास्टर IIM अहमदाबाद में लेंगे मैनेजमेंट ट्रेनिंग, एयरपोर्ट पर मिली विदाई!

पंजाब के सरकारी स्कूलों के 50 हेडमास्टर और हेडमिस्ट्रेस की एक टीम IIM अहमदाबाद के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के उद्देश्य से रवाना हो गई है। टीम को विदाई देने के लिए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे। यह कार्यक्रम सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग का तीसरा बैच है। हरजोत बैंस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस महत्वाकांक्षी कदम को साझा किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अपने स्कूलों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कितनी गंभीर है।

वहीं, पंजाब सरकार अब प्राइमरी स्कूलों के 72 शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजने की योजना बना रही है। इसी संबंध में, टुर्कू यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह एमओयू हाल ही में दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के बीच संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले शिक्षकों को तीन सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जो आधुनिक शिक्षा प्रणाली और शिक्षण विधियों पर केंद्रित होगी।

शिक्षा विभाग ने इस ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए इच्छुक शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन पत्र भरने वाले उम्मीदवारों में से वे लोग जो आवश्यक शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें चयन प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। यह कदम प्राइमरी शिक्षा के मानकों को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा पद्धतियों से अवगत कराया जा सके।

इससे पहले उच्च माध्यमिक और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रधानों को सिंगापुर से प्रशिक्षण दिया गया था, जिसके दौरान कुछ विवाद भी उत्पन्न हुए थे। हालांकि, सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाना और नए तरीकों को अपनाकर बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना। हाल ही में इन प्रयासों ने यह संकेत दिया है कि पंजाब की सरकार शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलने के लिए गंभीर है और नवाचार की ओर बढ़ रही है।

इन प्रयासों का अंततः लाभ छात्रों को मिलेगा, जिनके लिए एक बेहतर और शिक्षाप्रद वातावरण बना रहेगा। अगर सभी योजनाएं सफल होती हैं, तो निश्चित रूप से पंजाब के सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा, और आने वाले वर्षों में यह साबित होगा कि शिक्षा में निवेश सही दिशा में किया गया।