पंजाब में पराली संकट के लिए 80% सब्सिडी पर मशीनें, सहकारी बैंक से लोन योजना!

पंजाब सरकार ने राज्य में पराली जलाने की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी पर आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही, इस मशीनरी को खरीदने के लिए सहकारी बैंकों द्वारा किसानों को ऋण भी मुहैया कराया जाएगा। इस योजना का नाम “फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना” है, जिसका लक्ष्य पराली जलाने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को कम करना है।

सीएम मान ने किसानों से कहा है कि उन्हें इस योजना का पूरा लाभ उठाना चाहिए, क्योंकि इसमें 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि सहकारी बैंक इसके माध्यम से किसानों को कर्ज उपलब्ध कराएंगे, जिसे दस किश्तों में चुकाने का विकल्प दिया गया है और इस ऋण का भुगतान अधिकतम पांच वर्षों में करना होगा। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी, खासकर तब जब मशीनरी की लागत काफी अधिक होती है।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले सालों की तुलना में कमी आई है, जो इस बार कड़े कदमों और सख्ती के कारण संभव हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस साल लगभग 30% कम मामले सामने आए हैं। अब तक रिकॉर्ड के अनुसार, सरकार ने 50 किसानों पर रेड एंट्री की है और 65 किसानों पर कुल 1.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, एक लाख 70 हजार रुपये की रिकवरी भी की गई है।

राज्य में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं अमृतसर में पाई गई हैं, जहां 96 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद तरनतारन में 26, फिरोजपुर में 12 और अन्य जिलों में भी थोड़ा-थोड़ा मामला देखने को मिला है। एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी इस मुद्दे पर सख्त है और पहले ही इस बारे में एक्शन प्लान जारी कर चुका है। इसके अंतर्गत विभिन्न उपायों पर कार्य किया जा रहा है ताकि पराली जलाने की समस्या को सुलझाया जा सके।

राज्य सरकार और एनजीटी के प्रयासों के चलते उम्मीद की जा रही है कि किसानों को इस नई योजना का लाभ मिलेगा और वे पराली जलाने के बजाय इसे उचित तरीके से निपटाने में सक्षम होंगे। इससे न केवल प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी, बल्कि कृषि में भी एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। यह योजना न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह समाज और पर्यावरण की भलाई के लिए भी आवश्यक है।