फाजिल्का गेस्ट फैकल्टी का प्रदर्शन: डीसी ऑफिस के बाहर धरना, स्टूडेंट्स का समर्थन!
फाजिल्का के एमआर कॉलेज में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स ने बुधवार की रात को विद्यार्थियों के साथ मिलकर कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च का उद्देश्य अपनी मांगों के प्रति जागरूकता फैलाना था। इसके बाद, उन्होंने फाजिल्का के डीसी ऑफिस के समक्ष धरना प्रदर्शन किया, जहां पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स का कहना है कि वे कई वर्षों से सरकारी कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब सरकार ने उन्हें नौकरी से बाहर करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
एमआर कॉलेज के लैक्चरर तनविंदर सिंह ने बताया कि पंजाब के सरकारी कॉलेजों में कुल 2033 स्वीकृत पद हैं तथा 160 नए पद बनाए गए हैं। फाजिल्का के एमआर कॉलेज में 36 पद हैं, जिनमें से लगभग 20 गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स कार्यरत हैं। इस कारण से 16 पद अभी भी खाली हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले 25 वर्षों से पक्की भर्ती नहीं हुई है, और इसीलिए गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स ही सरकारी कॉलेजों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने अपने संघर्ष एवं मेहनत का भी जिक्र किया।
एक नई भर्ती नीति के अंतर्गत, सरकार ने 1158 लैक्चरर्स की नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं, जो अदालत के निर्देशों के अनुसार हैं। इस नई भर्ती से गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स के लगभग 850 परिवार प्रभावित हुए हैं। लैक्चरर्स का कहना है कि अब उन्हें विदाई दी जा रही है, जबकि वे कॉलेजों में कई वर्षों से कार्यरत हैं। इसलिए उनकी मुख्य मांग है कि उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें उचित मान-सम्मान तथा वेतनमान प्रदान किया जाए।
गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों का उचित समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्हें डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट और पंजाब स्टूडेंट यूनियन का समर्थन प्राप्त है, जो उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं और उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस धरने प्रदर्शन के माध्यम से गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स ने एकजुटता प्रदर्शित की और अपना संदेश साफ किया कि उनकी मेहनत और सेवा को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
यहां यह भी ध्यान देने योग्य है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और समय पर भर्तियों की आवश्यकता है, ताकि योग्य शिक्षकों को उनके स्थान पर समय पर नियुक्त किया जा सके। गेस्ट फैकल्टी लैक्चरर्स की परेशानियाँ केवल निजी नहीं हैं, बल्कि यह प्रणालीगत समस्याओं का भी प्रतीक हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इस मसले को गंभीरता से लेगी और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए कदम उठाएगी।









