किसानों का मानसा में प्रदर्शन जारी: कंगना के बयान से आहत किसान ने की खुदकुशी, मदद मांगी

भारतीय किसान यूनियन सिद्धपुर के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह दलेवाल ने हाल ही में एक दुखद घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि मंडी में कांग्रेस सांसद और मशहूर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनोट द्वारा किसानों के खिलाफ की गई बयानबाजी और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री के बयानों से आहत होकर एक किसान, गुरमीत सिंह, ने आत्महत्या कर ली। किसान समुदाय इस बेतहाशा स्थिति के लिए सरकार से प्रत्यक्ष आर्थिक समर्थन की मांग करते हुए धरना-प्रदर्शन कर रहा है। 25 सितंबर को खनौरी बॉर्डर पर चल रहे इस धरने के बीच मानसा जिले के ठूट्टियांवाली गांव के किसान गुरमीत ने आत्महत्या कर ली।

मृतक किसान के परिवार को मदद दिलाने के लिए मानसा के कैचियो में धरना पिछले तीन दिनों से जारी है। जगजीत सिंह ने कहा कि जब तक केंद्र और पंजाब सरकार मृतक किसान के परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा नहीं करती, तब तक यह धरना खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों भाजपा सांसद के बयानों से आहत होकर ही गुरमीत ने अपनी जान दी। उन्होंने बताया कि गुरमीत सिंह एक बे-जमीनी किसान थे और इलेक्ट्रिशियन का कार्य करते थे। उनके दो बच्चे हैं जो शादी के योग्य हैं, लेकिन अब घर की जिम्मेदारी उठाने वाला इस दुनिया में नहीं रहा।

बातचीत में, दलेवाल ने सरकार के रवैए पर चिंता जताते हुए कहा कि किसानों के दुख-दर्द को समझने की आवश्यकता है। किसानों के प्रति सरकार की अनदेखी हालात को और गंभीर बना रही है। धरने के दौरान उपस्थित लोगों की मुश्किलों के प्रति उन्होंने खेद व्यक्त किया, लेकिन कहा कि यह आंदोलन उनकी मजबूरी है। यदि सरकार किसान के परिवार को उचित सहायता देने का आश्वासन नहीं देती, तो किसान इस प्रकार के प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

किसान यूनियन का यह आंदोलन सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं हैं। दलेवाल ने कहा कि विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता। उन्होंने सभी किसानों से एकजुट रहने की अपील की है ताकि उनकी आवाज को सही मायनों में सुना जा सके। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसानों की समस्याएं राजनीतिक बयानबाजी के स्तर से काफी ऊपर हैं, और उन्हें तत्काल समाधान की आवश्यकता है।

किसान समुदाय ने अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर सरकार की नीति पर सवाल उठाने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन न केवल आर्थिक मदद की मांग है, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है कि किसान हितों की रक्षा की जानी चाहिए। किसान दलेवाल का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार को किसानों की आवाज सुनने और उनकी कठिनाइयों को पहचानने का एक अच्छा अवसर है। जब तक उचित समाधान नहीं मिलता, तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।