जालंधर रेप-मर्डर केस: मुख्य आरोपी को फांसी, हथौड़े से की थी बच्ची की हत्या
पंजाब के जालंधर में एक दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा हुआ है, जिसमें एक 12 साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसे बेरहमी से मार दिया गया। इस गंभीर अपराध के लिए अदालत ने आरोपी गुरप्रीत गोपी को फांसी की सजा सुनाई है। गोपी, जो कि एक मन में नशे का आदी है, ने सबसे पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी लाश को रेत भरी बोरियों में छिपा दिया। यह मामला इतना दर्दनाक था कि इसे अदालत में सुनवाई के दौरान क्रूरता का प्रतीक माना गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्चना कंबोज ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा का निर्णय लिया।
गुरप्रीत गोपी का साथी विकास, जो उसका चाचा का बेटा है, पहले से ही भगोड़ा घोषित हो चुका है। जब बच्ची का शव बरामद किया गया था, तब स्थानीय लोगों ने गोपी की जमकर पिटाई की थी। उस समय पुलिस ने आरोपी को भीड़ से बचाकर थाने ले गई, जहां उसकी आधी रात तक पूछताछ की गई। इस दौरान पुलिस ने विभिन्न सबूतों, जैसे कि खून से सना हथौड़ा, को अपने कब्जे में लिया था। बच्ची का शव आरोपी के घर से प्राप्त हुआ था, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई थी।
घटना के दिन, बच्ची सुबह के समय अपने घर के बाहर खेल रही थी, जब वह अचानक लापता हो गई। उसके पिता ने तुरंत उसकी खोजबीन शुरू की और पुलिस को सूचित किया। जांच करने के बाद, पुलिस ने क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की, जिससे साफ हो गया कि बच्ची गांव से बाहर नहीं गई। इसके बाद, पुलिस ने सघन तलाशी अभियान चलाया और गोपी को तलाशने का भी प्रयास किया।
जब पुलिस ने गोपी के घर की तलाशी ली, तो वहां उन्हें एक खून से सना हथौड़ा मिला, जो इस हत्या में प्रयोग किया गया था। इसके आधार पर पुलिस ने गोपी को गिरफ्तार किया। पूरी घटना ने गांव में एक हड़कंप मचा दिया था, और स्थानीय महिला एवं पुरुषों ने मिलकर इस अपराध के खिलाफ आवाज उठाई। यह मामला समाज में सुरक्षा और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
समाज में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त कानून और जन जागरूकता की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके। इस घटना ने पूरी जनसंख्या को झकझोर दिया है और सुरक्षा के पहलुओं को फिर से देखने की जरूरत को उजागर किया है। इस उच्च-profile केस में न्याय की प्रक्रिया को सख्ती से पालन करने के लिए सभी की निगाहें अदालत पर टिकी हुई हैं।









