फाजिल्का पंचायती चुनाव रद्द: विधायक की कार्यवाही, लापरवाह अफसर तलब!

पंजाब में पंचायती चुनावों का ऐलान किया गया है, लेकिन फाजिल्का जिले के दो गांवों के चुनावों को निरस्त कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाधुका गांव से अच्चाडिकी गांव की नई पंचायत का गठन किया गया है, जिसके लिए वार्डबंदी की अधिसूचना अब भी लंबित है। इस स्थिति के चलते अब इन दोनों गांवों में उपचुनाव का आयोजन किया जाएगा। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) गुरदर्शन लाल ने पुष्टि की कि लाधुका गांव के अंतर्गत अच्चाडिकी गांव की नई पंचायत की स्थापना की गई है। इसके बाद, स्थानीय निवासियों ने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत के आदेश के बाद, यह साफ हो गया कि दोनों गांवों की पंचायतें एक-दूसरे से अलग कर दी गई हैं, लेकिन वार्डबंदी की अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद यह नोटिफिकेशन किया जाएगा, जिसके बाद वोटर सूची तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोनों पंचायतों के लिए रिजर्वेशन का काम पहले ही कर लिया गया है। स्टेट चुनाव कमीशन ने सूचित किया है कि उपचुनाव आमतौर पर छह महीने के भीतर संपन्न कराए जाने हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जल्द ही इन दोनों पंचायतों के उपचुनाव भी कराए जाएंगे।

स्थानीय निवासियों की ओर से आरोप लगाया गया है कि 2018 में अच्चाडिकी गांव का गठन किया गया था, लेकिन प्रशासन ने इस मामले की ओर ध्यान नहीं दिया। हालात को गंभीरता से लेते हुए फाजिल्का से विधायक नरेंद्रपाल सवना ने संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और मानव संसाधनों की कमी के चलते इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि समयबद्ध तरीके से सभी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए उपचुनाव कराए जाएं। साथ ही, ग्राम पंचायतों के विकास व विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। पंचायत चुनावों का यही संवैधानिक ढांचा, गांवों के विकास के लिए जरूरी है और इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी।

इन दोनों घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है कि पंचायती चुनावों का आयोजन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें आती हैं। इसके बावजूद, स्थानीय नेताओं और निवासियों की सक्रियता से उम्मीद की जा सकती है कि ये समस्याएं जल्द हल होंगी और उपचुनावों का आयोजन समय पर संभव होगा।