पंजाब के पूर्व सीएम का हत्यारा तिहाड़ से पंजाब स्थानांतरण की मांग: SC का केंद्र को नोटिस

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में दोषी जगतार हवारा ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में हवारा ने अनुरोध किया है कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र, दिल्ली व पंजाब सरकार से इस पर जवाब मांगा है। इसके बाद, इस याचिका की सुनवाई की अगली तिथि तय की जाएगी। हवारा ने अपनी याचिका में बताया है कि वह तिहाड़ जेल में केवल एक सजायाफ्ता कैदी हैं और उनके खिलाफ दिल्ली में कोई अतिरिक्त मामला नहीं है, जिसके चलते उन्हें पंजाब में किसी जेल में रखा जाना चाहिए।

जगतार हवारा, जो फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है, 28 वर्षों से जेल में बंद है। वह 21 सितंबर 1995 को गिरफ्तार हुआ था और उसके बाद से उसे बेअंत सिंह की हत्या में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा दी गई। 2007 में ट्रॉयल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने जीवनावधि कारावास में बदल दिया। इसके चलते, उसने अपनी सजा काटने के लिए तिहाड़ जेल में प्रवेश किया। इस दौरान, हवारा का जेल जीवन हमेशा से सामान्य और बेदाग रहा है।

एक महत्वपूर्ण घटना यह भी है कि 22 जनवरी 2004 को हवारा ने चंडीगढ़ स्थित बुड़ेल जेल से कुछ साथियों के साथ मिलकर सुरंग के माध्यम से भागने की कोशिश की थी। हालांकि, उसे एक वर्ष के अंदर दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। तब से लेकर अब तक, वह जेल में हैं और सामान्य आचरण का प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी उम्र 54 वर्ष है और उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं है।

याचिका में हवारा ने यह भी उल्लेख किया है कि जेल में उनके आचरण की रिपोर्ट अभी तक उन्हें प्रदान नहीं की गई है, जो कि उनके मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इसके अलावा, वह एक देशद्रोह के मामले में भी बरी हो चुके हैं, जिससे दर्शाता है कि उनका इतिहास विवादित नहीं है। इस प्रकार की याचिका में इसकी पृष्ठभूमि और तर्क गरमागरम बहस का विषय बन गए हैं और सतर्कता से मामले पर विचार करने की आवश्यकता है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि जमानत और स्थानांतरण की मांग को लेकर न्यायालय का क्या दृष्टिकोण होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हवारा की याचिका ने न्यायालय और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को जन्म दिया है, जिससे यह साफ होता है कि पंजाब के आतंकी मामलों और सजा पर न्याय की प्रक्रिया में विवादों का होना अनिवार्य है। सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और अदालत का फैसला इस मामले में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।