पंजाब की कर्ज सीमा बढ़ी? केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को लिखा पत्र!
पंजाब में कर्ज सीमा को बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा कदम उठाए जा सकते हैं। केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्रालय को एक पत्र भेजा है, जिसमें पंजाब सरकार की कर्ज सीमा में 10 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी पर विचार करने की बात की गई है। वर्तमान में, राज्य की कर्ज लेने की सीमा 30,464 करोड़ रुपये है, लेकिन राज्य सरकार ने अधिक वित्तीय सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए इस सीमा में वृद्धि की मांग की है।
पंजाब सरकार ने वित्त मंत्रालय को 20 मार्च को पत्र लिखकर पावरकॉम के वित्तीय घाटे की स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बाद, 5 अप्रैल 2024 को पंजाब सरकार ने यह स्पष्ट किया कि 2022-23 में पावरकॉम में घाटा आने से पहले ही उदय योजना का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो चुका था। राज्य सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष बिजली खरीद में 2,757 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, जो कि राष्ट्रीय स्तर पर चीनी कोयले के उपयोग के निर्देशों के कारण है।
सरकार का मानना है कि ये सभी कारण उसकी वित्तीय स्थिति को खराब कर रहे हैं। 2022-23 में पावरकॉम ने घाटा झेला, जबकि 2020-21 और 2021-22 के दौरान यह लाभ में रहा। 2023-24 में पावरकॉम ने 830 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन भविष्य में बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर हो सकता है। इस बीच, पंजाब सरकार की कर्ज सीमा बढ़ाने की उम्मीदें उनके लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई हैं क्योंकि उन्हें अपने समस्त खर्चों को पूरा करने में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में कर्मचारियों को अगस्त के वेतन का भुगतान चार सितंबर को करना शामिल है। इसके साथ ही, 7 किलोवॉट पर तीन रुपये की बिजली सब्सिडी समाप्त करने और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी करने का निर्णय भी लिया गया है। इसके अलावा, वित्तीय संकट के मद्देनजर सरकार ने ग्रीन टैक्स लागू करने जैसे कठिन निर्णय भी किए हैं।
इससे पहले, केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष पंजाब की कर्ज सीमा में 2,387 करोड़ रुपये की कटौती की थी। अगस्त में हुई कैबिनेट बैठक में कर्ज सीमा बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय को पत्र लिखने की अनुमति दी गई थी। पंजाब सरकार का यह स्पष्ट तर्क है कि उन्हें पिछले प्रशासन से विरासत में कर्ज मिला है, जिसे चुकाना आवश्यक है। राज्य को कुल 69,867 करोड़ रुपये की कर्ज अदायगी करनी है, जिसमें से 23,900 करोड़ रुपये केवल ब्याज और कर्ज की अदायगी के लिए निर्धारित हैं।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच, पंजाब सरकार केंद्र सरकार से जल्दी सहारा पाने की आशा कर रही है, ताकि उसे अपने वित्तीय संकट से निपटने में सहायता मिल सके और राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा सके।









