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प्रदेश की नौकरियों में स्थानीय भाषाओं के ज्ञान की पात्रता जोड़ी जाये: डॉ. नवीन जोशी

नैनीताल, 12 मार्च । नैनीताल जनपद के डायट यानी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान भीमताल में प्राथमिक कक्षाओं के लिये कुमाउनी भाषा के माड्यूल निर्माण की कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला के समापन अवसर पर कायशाला समन्वयक डॉ. हेम चंद्र तिवारी ने कार्यशाला में किये गये कार्य की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार जोशी ने कार्यशाला में किये गये कार्य की उपयोगिता एवं विषय की गंभीरता को देखते हुए 5 दिन की एक और कार्यशाला आयोजित किये जाने की आवश्यकता जतायी। इस पर प्राचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने भी अपनी हामी भरी।

आर्य ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्थानीय भाषा कुमाउनी के महत्व व प्रयोग को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षकों और छात्र – छात्राओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना व अभिव्यक्ति कौशल का विकास करना है।

विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल संदर्भदाता उत्तराखंड की समस्त लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका “कुमगढ़” के प्रबंध सम्पादक डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने कुमाउनी भाषा के उन्नयन के लिये प्रदेश में निकलने वाली भर्तियों में स्थानीय लोकभाषाओं के ज्ञान की पात्रता जोड़ने एवं आगामी जनगणना में राज्य वासियों की मातृभाषा के रूप में स्थानीय भाषाओं कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, र्वांल्टी व रं आदि को दर्ज किये जाने की आवश्यता जताई। कुमाउनी मासिक पत्रिका ‘पहरू’ के सम्पादक नीरज पंत एवं पारम्परिक लोक संस्था ‘परम्परा’ के निदेशक बृजमोहन जोशी ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए अपने विचार रखे।

कार्यशाला में शिक्षिका भावना पांडे, बसंती लोहनी, नमिता भट्ट, भगवान बोरा, देवेंद्र सिंह, उमेश जोशी, हेम चंद्र शर्मा व महेश चंद्र ने भी विषय विशेषज्ञ के तौर पर सहभाग किया। कार्यशाला में वरिष्ठ प्रवक्ता ललित प्रसाद तिवारी, प्रवक्ता डॉ. विमल किशोर, डॉ. सुमित पाण्डे, डॉ. आरती जैन, रेखा तिवारी, डॉ. संजय गुरूरानी, तनुजा उप्रेती, मनोज चौधरी, डॉ. शैलेंद्र धपोला, डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी, सुभाष जोशी, नीरज नेगी, प्रयाग सिंह फर्स्वाण, भगवत सिंह, दीपक बोहरा, दलीप सिंह, भुवन जोशी, मीना देवी व पिंकी आदि का भी सहयोग रहा।