सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी से जुड़े मामले में सीबीआई और ईडी को लगाई फटकार
नई दिल्ली, 23 मार्च । उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके पूर्व प्रमोटर अनिल अंबानी से जुड़े कथित हजारों करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच में देरी को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों के कामकाज में हिचकिचाहट नजर आ रही है, ऐसे में जांच पारदर्शी, निष्पक्ष और तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद जांच की गति और तरीका चिंता का विषय है। कोर्ट ने कहा कि जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे न केवल कोर्ट बल्कि सभी हितधारकों का भरोसा कायम हो। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ईडी ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है जबकि सीबीआई ने भी लेन-देन की जांच के लिए ऑडिटरों की नियुक्ति की है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सेबी की रिपोर्ट में धोखाधड़ी और फंड हेराफेरी के आरोप सामने आने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। तब मेहता ने कहा कि अब तक चार लोगों गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
इसक पहले 4 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने जांच एजेंसियों से सुनिश्चित करने को कहा था कि अनिल अंबानी देश से बाहर न जाएं। अनिल अंबानी ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वो बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे। उच्चतम न्यायालय ने 23 जनवरी को अनिल अंबानी को नोटिस जारी करते हुए सीबीआई और ईडी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
याचिका पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस शर्मा ने दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जांच एजेंसियां बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी और उनके अफसरों की इस मामले में संलिप्तता की जांच नहीं कर रही हैं। प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मामला देश के इतिहास में शायद सबसे बड़ा कारपोरेट धोखाधड़ी है। सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा कि एफआईआर 2025 में दर्ज की गई थी, जबकि धोखाधड़ी 2007-08 से चल रही थी। याचिका में सार्वजनिक धन की साजिशन हेराफेरी और इस हेराफेरी में अनिल अंबानी की कंपनियों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है।









