हिसार : राखीगढ़ी के टीले पर खुदाई के दौरान मिला कंकाल
लेकर इस बात का पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि यह लोग कहां से आए थे।
राखी गढ़ी के टीलों पर इस वर्ष 22 जनवरी से भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ग्रेटर नोएडा की तरफ से खुदाई का कार्य का चल रहा हैं। करीब
एक सप्ताह पहले टीले नंबर सात पर ट्रेंच लगाकर खुदाई शुरू की तो ट्रेंच के किनारे एक
कंकाल का कुछ हिस्सा दिखाई दिया। जब खुदाई को आगे बढ़ाया तो कंकाल की टांग दिखाई दी।
अभी तक कंकाल पूरा नहीं दिख रहा। कंकाल के सिर की तरफ एक बड़ा मिट्टी के बर्तन का ऊपरी
भाग दिखाई दे रहा हैं। कंकाल मिलने से पूरे कैंप में मौजूद सभी शोधकर्ताओं के चेहरों
पर खुशी झलक रही है। बड़े सावधानी तरीके से खुदाई के काम को आगे बढ़ाया जा रहा हैं
ताकि कंकाल को पूरी तरह से सुरक्षित निकाला जा सके।
वर्ष 2015-16 में टीले नंबर सात पर पुणे की डेक्कन
यूनिवर्सिटी के वॉइस चांसलर प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर खुदाई
की गई थी और उस दौरान करीब 60 कंकाल पाए गए थे। उनमें से एक कंकाल में ही डीएनए मिला
था जिसका हैदराबाद और कोरिया में डीएनए हुआ था।
राखी गढ़ी के टीले नंबर सात पर आज भी किसान द्वारा
खेती की जा रही हैं क्योंकि ये जमीन किसान की पुस्तैनी जमीन है। जब भी पुरातत्व विभाग
खुदाई करता है तो किसान से लीज पर लेकर ही यहां खुदाई की जाती हैं। इस जगह पर किसान
ने सरसों की फसल उगाई हुई थी।लगातार इस जमीन की गुड़ाई और सिंचाई के कारण हजारों साल
पुरानी सभ्यता के अवशेष नष्ट हो रहे हैं।









