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शिवदासपुरा लैंड पूलिंग योजना की रफ्तार धीमी, ड्रेनेज सिस्टम नहीं बना तो योजना पर संकट

जयपुर, 11 मार्च । जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की शिवदासपुरा क्षेत्र में प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। विकास कार्यों की धीमी गति के कारण जेडीए की अन्य लैंड पूलिंग योजनाओं के धरातल पर उतरने को लेकर भी संशय की स्थिति बन रही है। वर्तमान में योजना क्षेत्र में करीब 29 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन सड़क निर्माण सहित अन्य आधारभूत कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

शिवदासपुरा और आसपास के दो अन्य गांवों को मिलाकर विकसित की जा रही इस योजना में ड्रेनेज सिस्टम विकसित नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। स्थानीय भू-भाग की मिट्टी ठोस और चिकनाईयुक्त होने के कारण बारिश के दिनों में खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है। ऐसे में उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं होने पर पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। हाल ही में जेडीए अधिकारियों ने क्षेत्र का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की है, लेकिन उसमें ड्रेनेज सिस्टम की आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। स्थानीय लोगों ने भी अधिकारियों का इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है।

शिवदासपुरा क्षेत्र में करीब 654 बीघा भूमि पर यह योजना विकसित की जा रही है। इसके तहत किसानों को उनकी जमीन के बदले 60 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाएंगे, जबकि शेष 40 प्रतिशत भूमि जेडीए के पास रहेगी।योजना के तहत 12 से 60 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण, फुटपाथ, कम्पाउंड वॉल, डिमार्केशन और अन्य आधारभूत विकास कार्य किए जाएंगे। यह योजना सालिग्रामपुरा, यारलीपुरा और शिवदासपुरा गांवों की करीब 163.5 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जा रही है।

योजना की खासियत यह है कि विकसित प्रत्येक भूखंड से लगभग 10 मिनट की पैदल दूरी पर पार्क, स्कूल और डिस्पेंसरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही 18 से 60 मीटर चौड़ी सड़कों का नेटवर्क भी बनाया जाएगा। लैंड पूलिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत खातेदारों को मुआवजा दिया जाएगा। जेडीए ने प्रभावित किसानों की सूची तैयार कर संरचनाओं के मुआवजे की राशि का आकलन भी कर लिया है।

क्या है लैंड पूलिंग व्यवस्था

लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसी क्षेत्र में विकास के लिए जमीन मालिकों की सहमति से भूमि ली जाती है। जिन भूखंडों के लिए सहमति नहीं बनती, वहां भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत जमीन लेकर मुआवजा दिया जाता है। सहमति से दी गई जमीन को एक साथ जोड़कर विकसित किया जाता है और बाद में उसका हिस्सा भूमि मालिकों को विकसित भूखंड के रूप में लौटाया जाता है।

इस संबंध में सिद्धार्थ महाजन ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर लैंड पूलिंग योजना की प्रगति की समीक्षा की थी और जयपुर के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी योजनाओं पर काम तेज करने के निर्देश दिए थे।