आम रास्तों और नालियों से कचरा हटाने, नियमित सफाई और कॉलोनियों में बडे कचरा पात्र लगाने के आदेश
जयपुर, 11 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम को कहा है कि वह शहर से ठोस कचरा हटाने, सड़कों और आम रास्तों व नालियों की सफाई के लिए जरूरी कदम उठाए। इसके साथ ही अदालत ने शहर की आवासीय कॉलोनियों में बड़े आकार के डपिंग बॉक्स लगाकर उन्हें रोज सुबह नियमित रूप से साफ करने को कहा है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश विमल चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा है कि नगर निगम को हर आवासीय कॉलोनी से कचरा हटाने के लिए समय सारणी तय करनी चाहिए। वहीं बाजार में भी कूडे की सफाई तय समय पर होनी चाहिए और इस संबंध में एरिया के संबंधित निवासियों व दुकानदारों को इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जो स्थानीय निवासी कचरा हटाने को लेकर अपनी ड्यूटी नहीं निभाते, उन पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। वहीं अदालत ने नगर निगम को यह बताने को कहा है कि वार्ड वार काम कर रहे सफाई कर्मचारियों का ब्यौरा पेश किए जाए और यह भी बताया जाए कि कितने सफाई कर्मचारियों को सफाई के अलावा दूसरे काम दिए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह नगर निगम के काम से खुश नहीं हैं।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता विमल चौधरी और अधिवक्ता योगेश टेलर ने कहा कि नगर निगम ने करीब 8000 सफाई कर्मचारियों की भर्ती की है, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कम सफाई कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। जिन कर्मचारियों की भर्ती की गई है, उनमें से ज्यादातर को या तो ऑफिस में लगाया जा रहा है या उनकी सेवा का इस्तेमाल सफाई के अलावा दूसरे काम के लिए किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि शहर में सफाई का काम रुक गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि कई सफाई कर्मचारियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्कीम के तहत लगाया गया है, जबकि उनका काम नियमित तौर पर सफाई करने का है। इसके जवाब में नगर निगम ने कहा कि उनके पास उपस्थिति रजिस्टर है, इसमें सफाई कर्मचारी अपने ऑफिस में अपनी उपस्थिति लगा रहे हैं। नगर निगम की ओर से रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय मांगा। जिस सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने नगर निगम को निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 18 मार्च को रखी है।









