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नरसिंहपुर में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने कलेक्टर ने बनाए नोडल अधिकारी, जांच दल गठित

नरसिंहपुर , 14 मार्च । मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एलपीजी गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने तथा जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर रजनी सिंह ने जिले में एलपीजी आपूर्ति की सतत निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है। इस संबंध में कलेक्टर द्वारा आदेश जारी कर अपर कलेक्टर नरसिंहपुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पूरे जिले में एलपीजी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर निगरानी रखेंगे।

जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी अनुभागों में जांच दल भी गठित किए गए हैं। इन जांच दलों का नेतृत्व संबंधित अनुभाग के अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) करेंगे। इन दलों का मुख्य उद्देश्य गैस एजेंसियों, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य एलपीजी का उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करना है, ताकि कहीं भी गैस सिलेंडर की जमाखोरी या कालाबाजारी जैसी गतिविधियां न हो सकें। प्रशासन का प्रयास है कि आम उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के एलपीजी गैस उपलब्ध होती रहे।

कलेक्टर द्वारा गठित जांच दलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने प्रभार क्षेत्र में लगातार निरीक्षण करें और यदि कहीं एलपीजी सिलेंडरों की अवैध भंडारण या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि गैस एजेंसियों द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार ही सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है।

जिले के नरसिंहपुर, गोटेगांव, गाडरवारा और तेंदूखेड़ा अनुभागों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। प्रत्येक अनुभाग में एसडीएम के नेतृत्व में एक संयुक्त जांच दल कार्य करेगा। इन दलों में संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार, क्षेत्र के थाना या चौकी प्रभारी तथा कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी को भी शामिल किया गया है। प्रशासन का मानना है कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनने से निगरानी और कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तु की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं गैस सिलेंडरों की जमाखोरी, अवैध बिक्री या कालाबाजारी की जानकारी मिले तो इसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।