मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेपी इंफ्राटेक के पूर्व सीएमडी को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत
नई दिल्ली, 25 मार्च । पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 हजार करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेपी इंफ्राटेक के पूर्व चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) मनोज गौर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। एडिशनल सेशंस जज धीरेंद्र राणा ने मनोज गौर की मां के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान मनोज गौर की ओर से पेश वकील डॉ. फारुख खान ने कहा कि मनोज गौर अपने माता-पिता की सबसे बड़े संतान हैं। लिहाजा उनके हाथों ही अंतिम संस्कार किया जाना है। उसके बाद कोर्ट ने पांच लाख रुपये के मुचलके पर अंतरिम जमानत पर गौर को रिहा करने का आदेश दिया। इसके पहले भी 24 जनवरी को कोर्ट ने मनोज गौर को अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए 14 दिनों की अंतरिम जमानत दी थी।
मनोज गौर पर आरोप है कि उसने घर खरीददारों से जुटाई गई रकम की हेराफेरी करने में अहम भूमिका निभाई थी। ईडी के मुताबिक ये मामला जेपी ग्रुप की दो कंपनियों जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) और जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ मामला है। ईडी के मुताबिक 2017 में घर खरीददारों के विरोध प्रदर्शन के बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें जेपी ग्रुप पर धोखाधड़ी करने, आपराधिक साजिश रचने और कपटपूर्वक निवेश कराने के आरोप लगे थे।
ईडी के मुताबिक जेपी ग्रुप के कथित धोखाधड़ी में जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं जिनमें निवेशकों को 2010-11 से घरों का वादा किया गाय था, लेकिन आज तक कई घर खरीददारों को मकान का कब्जा नहीं मिला। ईडी के मुताबिक जांच में पता चला कि मनोज गौर कंपनी के प्रबंध निदेशक के रुप में वित्तीय फैसलों और प्रबंधन में सीधे-सीधे शामिल था और खरीददारों की रकम को ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।









