पांच दिन की हड़ताल के बाद एंबुलेंस कर्मचारियों का प्रदर्शन, बड़े आंदोलन की चेतावनी
शिमला, 16 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की पांच दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल सोमवार को प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई। सीटू से संबद्ध 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने शिमला के कुसुंपटी स्थित नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर श्रम कानूनों को लागू करने, न्यूनतम वेतन देने और कर्मचारियों की कथित प्रताड़ना रोकने की मांग उठाई।
यूनियन के अनुसार 12 से 16 फरवरी तक चली इस हड़ताल के दौरान प्रदेशभर में कई स्थानों पर एंबुलेंस सेवाएं प्रभावित रहीं। प्रदर्शन के बाद यूनियन का प्रतिनिधिमंडल एनएचएम के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर से मिला और मांगों के समाधान की मांग की।
प्रबंध निदेशक ने आश्वासन दिया कि जिन कर्मचारियों को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया या स्थानांतरित किया गया है, उन्हें जल्द बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही अन्य मांगों पर चर्चा के लिए 7 मार्च को एनएचएम प्रबंधन, यूनियन और मेडस्वान फाउंडेशन प्रबंधन के बीच बैठक बुलाई जाएगी।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि एनएचएम के अंतर्गत एंबुलेंस सेवाएं संचालित करने वाली कंपनी के अधीन कार्यरत पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारियों को घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है और उनसे 12-12 घंटे काम लेने के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और अन्य न्यायिक मंचों के आदेशों के बावजूद श्रम कानूनों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा है।
यूनियन नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यूनियन गतिविधियों में सक्रिय कर्मचारियों का तबादला कर दिया जाता है या उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। कई कर्मचारियों को महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखने, छुट्टियां न देने और ईपीएफ-ईएसआई के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों की भी शिकायतें सामने आई हैं। यूनियन का कहना है कि पहले ये कर्मचारी जीवीके ईएमआरआई के अधीन कार्यरत थे, लेकिन सेवा समाप्ति के समय उन्हें छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी और अन्य देयकों का भुगतान नहीं किया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन और सीटू नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को सरकारी नियमों के अनुसार न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और सभी वैधानिक सुविधाएं तुरंत दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।









