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कांग्रेस के नेतृत्व में हिमाचल आर्थिक अराजकता और वित्तीय पतन की कगार पर : विपिन परमार

धर्मशाला, 19 फ़रवरी । भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज प्रशासनिक अव्यवस्था, वित्तीय कुप्रबंधन और राजकोषीय असंतुलन का शिकार बन चुका है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के शासनकाल में प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई है और हिमाचल आर्थिक अराजकता की स्थिति में पहुंच गया है। यह सामान्य संकट नहीं है, यह शासन की विफल नीतियों का परिणाम है। उन्होंने यह बात वीरवार को सदन में आरडीजी पर चर्चा के दौरान कही।

परमार ने कहा कि वित्त आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को “केंद्र सरकार की कठपुतली” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त दायित्व निभाने वाली संस्था है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लंबित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट को लेकर केंद्र सरकार द्वारा गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। “यह कोई साधारण प्रशासनिक त्रुटि नहीं है। यदि विभागों के माध्यम से गलत उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजे गए हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है। जब जांच होगी तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी,” उन्होंने चेतावनी दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र पोषित योजनाओं के लिए प्राप्त धन को योजनाओं में व्यय करने के बजाय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में लगा दिया गया। बिलासपुर रेलवे परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 500 करोड़ रुपये रेलवे कार्यों के लिए आए थे, किंतु प्रदेश सरकार ने उस धन को अन्य मदों में समाहित कर लिया।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के समय प्रारंभ की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को सत्ता में आते ही बंद कर दिया गया, जिससे प्रदेश का हर वर्ग प्रभावित हुआ। राजनीतिक प्रतिशोध की भावना में जनता के हितों की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

नियम 102 के तहत लाए गए संकल्प पर टिप्पणी करते हुए विपिन सिंह परमार ने कहा कि यह अवसर आत्ममंथन का था, लेकिन इसे केंद्र सरकार के विरुद्ध राजनीतिक बयानबाजी का मंच बना दिया गया।

उन्होंने प्रदेश की ट्रेजरी व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वित्तीय प्रवाह इस कदर बाधित है कि भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यह स्थिति सामान्य नहीं है। यह राजकोषीय अनुशासन की विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि आरडीजी पर चर्चा का उद्देश्य केंद्र को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधारने की ठोस रणनीति प्रस्तुत करना होना चाहिए था।