अर्धनिर्मित डायवर्सन बना मुसीबत, धूल और हादसों से राहगीर परेशान
खूंटी, 10 फ़रवरी । खूंटी–सिमडेगा मुख्य मार्ग पर पेलौल गांव के समीप बनई नदी पर बनाया जा रहा अस्थायी डायवर्सन इन दिनों राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया है। पुल टूटने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में तैयार किया जा रहा यह डायवर्सन अभी तक अधूरा है, जिसके कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को रोजाना धूल, जाम और दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
अर्धनिर्मित डायवर्सन से लगातार उड़ रही धूल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल के कारण खांसी, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। वहीं धूल की मोटी परत के कारण वाहन चालकों को रास्ता साफ नजर नहीं आता, जिससे अक्सर डायवर्सन के पास दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई बार वाहन फिसलकर गिर जाते हैं या आमने-सामने टकराने की स्थिति बन जाती है।
उल्लेेेेखनीय है कि खूंटी–सिमडेगा रोड पर वर्ष 2007 में बना पुल 16 जून 2025 को भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त होकर टूट गया था। इसके बाद आवागमन बहाल रखने के लिए बनई नदी पर 1 करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से डायवर्सन निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि कार्य प्रारंभ हुए करीब आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हो पाया है।
निर्माण की धीमी रफ्तार से लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि यह मार्ग राजधानी रांची और खूंटी के अलावा ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में अधूरा डायवर्सन लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। लोगों ने विभाग से जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा करने और धूल से राहत के लिए नियमित पानी छिड़काव की मांग की है।
इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के कनीय अभियंता अमित कुमार ने बताया कि बहुत जल्द डायवर्सन पर पिचिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा, इससे धूल की समस्या कम होगी और आवागमन सुगम हो सकेगा। विभाग ने आश्वासन दिया है कि कार्य को शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।









