आईजीएमसी में डॉक्टरों का कमाल, बिना ओपन सर्जरी पेट के कैंसर का जटिल ऑपरेशन सफल
शिमला, 11 फ़रवरी । इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पेट के कैंसर से पीड़ित 44 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी पूरी तरह लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक कर दी है। इस सर्जरी में मरीज के पेट का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा हटाया गया और पूरी प्रक्रिया शरीर के अंदर ही की गई, जबकि केवल नमूना बाहर निकालने के लिए छोटा सा चीरा लगाया गया।
करीब पांच से छह घंटे तक चली यह “नियर टोटल गैस्ट्रेक्टॉमी” सर्जरी बिना ओपन सर्जरी में बदले सफलतापूर्वक पूरी हुई, जिसे आईजीएमसी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आमतौर पर इस तरह की जटिल सर्जरी बड़े निजी अस्पतालों में की जाती है, जबकि उत्तर भारत के किसी सरकारी अस्पताल में इस तरह की सर्जरी पहली बार होने का दावा किया गया है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
यह सर्जरी सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी यूनिट के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वेद शर्मा के मार्गदर्शन में की गई। ऑपरेशन का नेतृत्व सहायक प्रोफेसर डॉ. विपन के. शर्मा ने किया, जबकि टीम में सीनियर रेजीडेंट डॉ. शुभम अग्रवाल और डॉ. लक्ष्य बंसल तथा जूनियर रेजीडेंट डॉ. आशीष कटवाल शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज पवार ने किया।
आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि यह अत्यंत जटिल और उन्नत सर्जरी है, जिसमें उच्च स्तर की सर्जिकल कुशलता और टीमवर्क की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सर्जरी के दौरान कैंसर उपचार से जुड़े सभी जरूरी चिकित्सा मानकों का पालन किया गया। आधुनिक मशीनों और उपकरणों के नवीनीकरण तथा नए उन्नत सेटअप उपलब्ध होने से इस तरह की सर्जरी अब प्रदेश में ही संभव हो रही है, जिससे मरीजों को उन्नत उपचार के लिए बड़े निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।









