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गुरुग्राम: ब्रह्मांड में राम भी रहेंगेे, कृष्ण भी, गीता भी रहेगी, रामायण भी: डा. सतीश पूनिया

गुरुग्राम, 11 फरवरी । गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के भारतीय ज्ञान एवं भाषा विभाग एवं आईसीपीआर द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए दार्शनिक और व्यवहारिक मार्गदर्शिका विषय पर बुधवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य गीता के दार्शनिक, नैतिक एवं व्यावहारिक आयामों को समकालीन संदर्भों में पुनर्परिभाषित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध सामाजिक और राजनीतिक विचारक डॉ. सतीश पूनिया रहे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में गीता को केवल आध्यात्मिक ग्रंथ न मानकर जीवन, नेतृत्व, नीति और राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि गीता के सिद्धांत वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान में अत्यंत उपयोगी हैं। विशिष्ट अतिथि प्रो. पंकज कुमार मिश्र, प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि गीता भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए संतुलन, विवेक और नैतिक दिशा प्रदान करती है।

इस दौरान डॉ. सतीश पूनिया की पुस्तक अग्निपथ नहीं जनपथ (संवाद से संघर्ष तक)पर भी चर्चा की गई। अपने संबोधन में डॉ. सतीश पूनिया ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक लिखने का मकसद यही है कि अपने अनुभव समाज को बताए जाएं। उन्होंने कहा कि हम भरोसेमंद हैं कि किसी भी परिस्थिति में इस दुनिया में, ब्रह्मांड में राम भी रहेंगेे, कृष्ण भी रहेंगे। गीता भी रहेगी, रामायण भी रहेगी। गीता का सबसे बड़ा महत्व यह है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के प्रधानमंत्री जापान जाते हैं और वहां के राष्ट्रपति को गीता भेंट करते हैं। जो देश दुनिया में अपने जलवे के लिए जाना जाता है, उस देश को भारत की तरफ से दिया जाने वाला उपहार गीता है। उन्होंने कहा कि गीता की व्यापकता नैसर्गिक व आध्यात्मिक है। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. संजय कौशिक ने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन और प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन अकादमिक विमर्श को नई दिशा देते हैं और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का सशक्त माध्यम बनते हैं। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. संजय अरोड़ा, डॉ. राकेश योगी, प्रोफेसर नीरा वर्मा समेत विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।