दिव्यांग बच्ची के पेशाब की थैली से निकली 40 एमएम की पथरी
बांदा, 17 फ़रवरी । बिगड़ते खानपान के चलते इन दिनों गाल ब्लैडर, किडनी और पेशाब की थैली में पथरी होना एक आम समस्या बन गई है, लेकिन अब यह गंभीर बीमारी छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सामने आया है, जहां एक 10 वर्षीय मानसिक रूप से विक्षिप्त और दिव्यांग बच्ची के पेशाब की थैली से 40 एमएम की विशाल पथरी निकाली गई है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम ने सफल ऑपरेशन कर इस मासूम को असहनीय दर्द से निजात दिलाई है।
दर्द बयां नहीं कर पाती थी मासूम, सिर्फ रोती रहती थी
जानकारी के अनुसार, बांदा के बबेरू क्षेत्र के रहने वाले जय प्रकाश की 10 वर्षीय पुत्री काफी समय से इस गंभीर समस्या से जूझ रही थी। शिवानी के बाबा अर्जुन ने मंगलवार को बताया कि उनकी नातिन शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी विक्षिप्त है। अपनी बीमारी और दर्द को वह बोलकर बता नहीं पाती थी और तकलीफ के कारण दिन-रात रोती रहती थी। परिजनों ने उसे कई जगह डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कहीं से भी कोई आराम नहीं मिला।
मेडिकल कॉलेज में हुआ सफल ऑपरेशन
थक-हारकर परिजन बच्ची को रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहाँ सर्जरी विभाग के डॉ. अनूप कुमार सिंह ने बच्ची को देखा। उन्होंने तुरंत बच्ची को भर्ती कर आवश्यक जांचें करवाईं, जिसमें पेशाब की थैली में एक बड़ी पथरी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉ. अनूप और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर बच्ची के शरीर से 40 एमएम की पथरी बाहर निकाल दी। अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है।
गरीबी देख माफ किया गया खर्च
इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मानवता की मिसाल पेश की है। डॉ. अनूप ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में लगभग डेढ़ घण्टे का समय लगा। बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। मरीज की गरीबी को देखते हुए कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एस. के. कौशल ने ऑपरेशन का सरकारी चार्ज भी माफ कर दिया, जिससे परिजनों को इस इलाज के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा।
इस सफल ऑपरेशन में डॉ. अनूप कुमार सिंह के साथ डॉ. श्रेया, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. प्रिया दीक्षित और उनकी पूरी टीम का अहम योगदान रहा।









