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रामदेव संबंधी व्यक्तित्व कंटेंट के सोशल मीडिया में इस्तेमाल पर हाई काेर्ट की राेक

नई दिल्ली, 25 फरवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाबा रामदेव के नाम, फोटो, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े दूसरे कंटेंट का बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने बिना अनुमति वाले कंटेंट को सभी प्लेटफार्म्स से 72 घंटे के अंदर हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि बाबा रामदेव से जुड़े पैरोडी, व्यंग्य, राजनीतिक कमेंट और फैक्ट चेक को हटाने का आदेश नहीं दिया गया है। बाबा रामदेव ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एआई और डीफफेक के जरिये ऑनलाइन कंटेंट पर रोक की मांग की है। सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव की ओर से कहा गया कि ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बाबा रामदेव से जुड़े कंटेंट का दुरुपयोग किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफार्म की ओर से कहा गया था कि व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए दायर इस याचिका के जरिये बाबा रामदेव पैरोडी, व्यंग्य, राजनीतिक कमेंट , न्यूज रिपोर्ट और फैक्ट चेक को भी हटवाना चाहते हैं। अगर ऐसा होता है, तो ये नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म की ओर से कहा गया था कि बाबा रामदेव अपनी याचिका में उस वीडियो को हटाने की मांग कर रहे हैं, जिसमें वे हाथी पर चढ़े हैं। वे उस वीडियो को हटाने की मांग कर रहे हैं, जिसमें उन्हें एक एलोपैथी डॉक्टर के पास इलाज के लिए पड़ा हुआ दिखाया जा रहा है। वे पेट्रोल की कीमतों पर उनके पहले के बयानों को हटवाना चाहते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने कहा कि ऐसी अभिव्यक्ति की सुरक्षा कानून के जरिये मिली हुई है।

इसके पहले उच्च न्यायालय ने संगीतकार जुबिन नौटियाल, अभिनेत्री काजोल, अभिनेता विवेक ओबेरॉय, आंध्रप्रदेश के उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, फिल्म अभिनेता सलमान खान, अभिनेता अजय देवगन, अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन, पत्रकार सुधीर चौधरी, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, तेलुगु अभिनेता नागार्जुन, अभिनेत्री ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और फिल्म प्रोड्यूसर करण जौहर के व्यक्तित्व से जुड़ी किसी बात का बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं करने का आदेश दिया था।