हिसार काे जीरो वेस्ट मॉडल के रूप में विकसित करने की मुहिम को मिली बड़ी कामयाबी
बेहतर बनाने के लिए पूरे शहर में डोर-टू-डोर का कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही
स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष रूप से नीले व हरे के प्रतीक
चिन्ह बनाए है, जो क्षेत्रवासियों को गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए प्रेरित
कर रहे है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता व्यवस्था की बेहतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन
सुनिश्चित करने के लिए शहर को दो जोनों में विभाजित किया गया है। जोन-1 की जिम्मेदारी
अतिरिक्त आयुक्त शालिनी चेतल को सौंपी गई है, जबकि जोन-2 की देखरेख अतिरिक्त निगमायुक्त
डॉ. प्रदीप हुड्डा द्वारा की जा रही है। दोनों अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई,
कचरा संग्रहण और पृथक्करण से जुड़े कार्यों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जिससे जमीनी
स्तर पर सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी प्रकार दोनों जोनों में सीएसआई,
एएसआई, एचएसआई और एनजीओ लगातार स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रहे है।
वर्तमान
में नगर निगम के दोनों जोन से रोजाना करीब 12 टन गीला कचरा पृथक रूप से एकत्र किया
जा रहा है। इस गीले कचरे का उपयोग खाद निर्माण के लिए किया जा रहा है। इससे जहां कचरे
का वैज्ञानिक और सही तरीके से निस्तारण हो रहा है, वहीं जैविक खाद के रूप में यह पर्यावरण
संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। निगमायुक्त ने यह भी बताया कि गीले कचरे के अलग हो जाने से सूखे कचरे और अन्य
अपशिष्ट के निपटान में कम संसाधन लग रहे हैं। पहले मिश्रित कचरे के कारण जहां अधिक
संसाधन खर्च होते थे, वहीं अब व्यवस्था सरल और सुचारु हो गई है।









