वाराणसी: बीएचयू की पूर्व प्राेफेसर मंगला कपूर और प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल को मिलेगा पद्मश्री
वाराणसी, 25 जनवरी । गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की पूर्व प्रो. मंगला कपूर और प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इसकी जानकारी पाते ही विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष व्याप्त है। दोनों विशिष्ट जनों को बधाई देने का तांता लग गया।
बीएचयू के संगीत विभाग की पूर्व प्रोफेसर मंगला कपूर ग्वालियर घराने से जुड़ी है। उन्हें राज्यसभा द्वारा “रोल मॉडल” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रोफेसर कपूर प्रतिभाशाली युवा संगीतकारों को नि:शुल्क संगीत शिक्षा प्रदान करती हैं। जब वे 12 साल की थी तब उनके चेहरे पर तेजाब उनके नौकर ने ही फेंक दिया था। छह साल तक लगातार इलाज और परिजनों खासकर पिता से मिली हिम्मत और हौसला आफजाई से उन्होंने संगीत में स्नातक, परास्नातक और फिर पीएचडी की। इसके बाद वर्ष 1989 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत विभाग में शिक्षक बनी और 30 साल तक विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा दी। भारत की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर प्रो. मंगला कपूर के जीवन पर आधारित मराठी में एक फिल्म भी बनी है। प्रो. मंगला ने अपने जीवन के संघर्षों पर आधारित पुस्तक भी लिखी हैं । पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुनी जानी के बाद प्रो. मंगला कपूर पत्रकारों से बातचीत में बेहद भावुक दिखी। उन्होंने पुरस्कार के लिए आभार जताया।
प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के मेडिसिन विभाग में सेवा दे चुके है। प्रो. अग्रवाल ने कालाजार के निदान और इसके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा ‘विजिटर पुरस्कार’ और ‘डा. पीएन राजू ओरेशन’ सम्मान मिल चुका है। प्रो. अग्रवाल ने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की एक खुराक से कालाजार के उपचार की तकनीक खोज की। इस खोज को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने भी मान्यता दिया। इसके बाद कालाजार की वैक्सीन के शोध में भी वे शामिल रहे।









