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जीतू पटवारी ने एसआईआर के तहत मतदाता सूची में गड़बड़ी को बताया लोकतंत्र पर सीधा हमला, निर्वाचन आयोग को सौंपा ज्ञापन

भाेपाल, 22 जनवरी । मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया का 23 जनवरी को अंतिम दिन है। इसी बीच कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर सुनियोजित तरीके से वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को भोपाल स्थित निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव, वरिष्ठ नेता जे.पी. धनोपिया, भोपाल शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, भोपाल ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनोखी पटेल, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष साविस्ता जकी, मतदाता सूची प्रभारी ललित सेन सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी और नेता शामिल रहे।

लाखों नाम कटने का आरोप

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि हाल ही में मतदाता सूची में 11 लाख नए नाम जोड़े जाने और साथ ही बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और मताधिकार को कमजोर करने का प्रयास प्रतीत होती है।

पटवारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार एक व्यक्ति सीमित संख्या में ही आपत्तियां दर्ज कर सकता है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति द्वारा 200-200 तक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (BLA) और कुछ बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की मिलीभगत से मतदाताओं पर दबाव डालकर जबरन फॉर्म-7 भरवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।

चुनाव आयोग और बीजेपी पर सीधे सवाल

जीतू पटवारी ने कहा, “बीजेपी चुनाव हारने के डर से अब मैदान में नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट में खेल कर रही है। बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

मंत्री विश्वास सारंग पर भी उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और उनकी सीट सहित दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में करीब एक-एक लाख वोटों की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने इसे मतदाता सूची से नाम कटने से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और कानूनी लड़ाई

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़कों से लेकर न्यायालय तक ले जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देगी।